सुर की देवी थीं आशा भोसले — डॉ राघवेन्द्र नारायण सिंह

सुर की देवी थीं आशा भोसले — डॉ राघवेन्द्र नारायण सिंह

सुरदेवी आशा ताई को दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि

राजेश्वरी महिला स्नातकोत्तर महिला महाविद्यालय में आज सुरदेवी आशा भोसले की स्मृति में एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। श्रद्धांजलि सभा में महाविद्यालय के प्रबंध निदेशक और ख्यात साहित्यकार डॉ राघवेन्द्र नारायण सिंह ने पार्श्व गायन के क्षेत्र में किये गये आशा भोसले के द्वारा किए गए अविस्मरणीय योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि आशा जी ने कठिन परिस्थितियों में अपनी गायन प्रतिभा को निखारते हुए सुर साधना के माध्यम से बारह हजार से अधिक गीतों को अपना स्वर देकर अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की।

rajeshswari

अल्पायु में ही उन्हें गायन के क्षेत्र में आना पड़ा लेकिन उन्होंने अपने सुर के माध्यम से सत्तर दशकों तक निरंतर गायन करते हुए श्रोताओं के ऊपर अपने सुर का जो जादू बिखेरा वह आज भी और आने वाले दिनों में भी यथावत कायम रहता है। वे सुर की देवी थीं। अंग्रेजी के महान कवि जान कीट्स का उल्लेख करते हुए डॉ राघवेन्द्र सिंह ने कहा कि कलाएं कभी मरती नहीं हैं।

संगीत में दिव्यता होती है जो कलाकार के साथ उसके गीत संगीत को अमर बनाती है। श्रद्धांजलि सभा में महाविद्यालय के शिक्षकों डॉ धीरेन्द्र तिवारी, प्रीति राय, सरोजा देवी, इकबाल अहमद , सुनीता कन्नौजिया,अजय कुमार, अवनीश मौर्या आदि ने भी छात्राओं के साथ आशा ताई को अपने विचारों के माध्यम से श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके गीतों का स्मरण किया। कार्यक्रम का संचालन शालू गिरि ने किया। समापन वक्तव्य उपनिदेशक अंशुमान सिंह ने किया।

इसे भी पढ़े   चलती ट्रेन में एक और यात्री की गोली मारकर हत्या, डीडीयू रेल मंडल में दहशत
Shiv murti

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *