हरियाली और जल विहार के बीच स्वर्णमयी आसन पर विराजे बाबा बटुक भैरव
51 किलो पंचमेवे से हुआ विशेष श्रृंगार, हजारों श्रद्धालुओं ने किए बालरूप के दर्शन
*वाराणसी (जनवार्ता)*। कमच्छा स्थित प्राचीन श्री बाबा बटुक भैरव मंदिर रविवार को भक्ति और आस्था से सराबोर रहा। हरियाली एवं जल विहार श्रृंगार में बाबा बटुक भैरव स्वर्णमयी आसन पर विराजमान होकर श्रद्धालुओं को दर्शन दिए। फूल-पत्तियों, फलों और बर्फ से सजी प्राकृतिक छटा के बीच बाबा के बालरूप के दर्शन कर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।


बाबा के विशेष श्रृंगार के दर्शन के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी। प्रातः पांच बजे से मंदिर के बाहर कतार लगनी शुरू हो गई। पंचामृत स्नान के बाद मंगला आरती हुई और दर्शन-पूजन का क्रम शुरू हुआ। दिन बढ़ने के साथ श्रद्धालुओं की संख्या भी बढ़ती गई। घंटों प्रतीक्षा के बाद दरबार में पहुंचे भक्त बाबा के दिव्य बालस्वरूप को निहारते हुए हाथ जोड़कर अपने आराध्य से मनोकामना करते नजर आए।
हरियाली और जल विहार की झांकी में मंदिर परिसर को प्राकृतिक वातावरण का स्वरूप दिया गया। बर्फ से तैयार झांकी के साथ रंग-बिरंगे फूल, फल और पत्तियों से परिसर को सजाया गया था। कश्मीरी फूलों से मंदिर को बगीचे का स्वरूप दिया गया। गर्भगृह सहित पूरे मंदिर की विशेष सजावट ने बाबा के दरबार की दिव्यता को और बढ़ा दिया। इस अवसर पर बाबा का 51 किलो पंचमेवे से विशेष श्रृंगार किया गया।
रात्रि नौ बजे बाबा की महाआरती हुई। महंत राकेश पुरी ने 1008 बत्ती वाले दीपदान और सवा किलो कपूर से महाआरती की। इस दौरान 51 भक्तों ने एक साथ डमरू वादन किया, जिससे मंदिर परिसर डमरू की गूंज से गुंजायमान हो उठा। आरती की लौ, डमरू की गूंज और बाबा के दिव्य स्वरूप से पूरा वातावरण शिवमय हो गया।
मंदिर के महंत राकेश पुरी एवं भास्कर पुरी के निर्देशन में आयोजन की व्यवस्थाएं संभाली गईं। संकल्प संस्था के संरक्षक अनिल कुमार जैन, आलोक जैन, रमेश चंद अग्रवाल, गीता जैन सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु और गणमान्यजन मौजूद रहे।
हरियाली एवं जल विहार श्रृंगार ने काशी की उस समृद्ध धार्मिक परंपरा की झलक पेश की, जहां आस्था, भक्ति और उत्सव के माध्यम से श्रद्धालु अपने आराध्य से जुड़ते हैं।

