ऐतिहासिक कोटवां गांव के रामलीला पर संकट के बादल
ग्रामीणों ने जिम्मेदार अधिकारियों से जवाबदेही तय करने की उठाई मांग
वाराणसी। काशी विद्यापीठ विकासखंड के कोटवा गांव स्थित ऐतिहासिक रामलीला एवं विजयादशमी मैदान की बदहाल स्थिति को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि मैदान के विकास और निर्माण का कार्य करीब डेढ़ वर्ष से अधूरा पड़ा है और पिछले एक वर्ष से काम पूरी तरह बंद है। विजयादशमी नजदीक होने के बावजूद मैदान में अभी कई महत्वपूर्ण कार्य बाकी हैं।


ग्रामीणों के अनुसार मैदान में रामलीला आयोजन के लिए मंच का निर्माण, प्रवेश द्वार लगाने और कमरों के निर्माण सहित अन्य कार्य अभी पूरे किए जाने हैं। इसके अलावा मैदान तक पहुंचने वाले रास्ते का निर्माण भी अधूरा है। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से उन्हें आश्वासन दिया जा रहा है कि रामलीला से पहले रास्ता और अन्य निर्माण कार्य पूरा करा दिए जाएंगे, लेकिन अब तक स्थिति जस की तस बनी हुई है।
बताया गया कि ग्राम पंचायत स्तर पर विकास कार्य खंड विकास अधिकारी के मार्गदर्शन और ग्राम सचिव की देखरेख में कराया जा रहा है। ग्रामीणों का सवाल है कि जब ऐतिहासिक रामलीला और विजयादशमी जैसे महत्वपूर्ण आयोजन की जानकारी पहले से है, तो निर्माण कार्य समय रहते पूरा क्यों नहीं कराया गया।
विजयादशमी पर आयोजन कैसे होगा? यह सवाल अब ग्रामीणों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि तत्काल मौके का निरीक्षण कर शेष कार्यों की समीक्षा की जाए और विजयादशमी से पहले मैदान तथा संपर्क मार्ग का निर्माण पूरा कराया जाए, ताकि ऐतिहासिक रामलीला के आयोजन में किसी तरह की बाधा न आए।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते कार्य पूरा नहीं कराया गया और आयोजन प्रभावित हुआ तो विजयादशमी के दिन जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। ग्रामीणों ने यह भी कहा है कि प्रशासन उनकी मांग को गंभीरता से लेते हुए निर्माण कार्य की समयबद्ध निगरानी सुनिश्चित करे।
अब देखना यह है कि विजयादशमी से पहले जिम्मेदार विभाग मैदान को आयोजन के योग्य बना पाता है या वर्षों से चली आ रही शिकायत इस बार भी आश्वासनों तक ही सीमित रह जाती है।

