पद्मश्री प्रो. टीके लहरी से आईसीयू में मारपीट का आरोप
बीएचयू ने जांच के लिए गठित किया मेडिकल बोर्ड
वाराणसी (जनवार्ता)। बीएचयू अस्पताल के कार्डियोथोरेसिक आईसीयू में पिछले करीब आठ माह से भर्ती पद्मश्री सम्मानित वरिष्ठ चिकित्सक प्रो. टीके लहरी से कथित मारपीट का मामला सामने आया है। परिजनों ने कार्डियोथोरेसिक विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अरविंद पांडेय पर गाली-गलौज और थप्पड़ मारने का आरोप लगाया है। कथित घटना में प्रो. लहरी के चेहरे और एक आंख में चोट आने की बात कही गई है। चोट के कारण उनकी आंख लाल होने की जानकारी सामने आई है।

परिजनों के अनुसार घटना 29 अगस्त की रात सुपरस्पेशियलिटी ब्लॉक की पांचवीं मंजिल स्थित कार्डियोथोरेसिक आईसीयू में हुई। उनका आरोप है कि प्रो. लहरी अपने बेड के पास थे, तभी डॉ. अरविंद पांडेय ने कथित तौर पर उनके साथ दुर्व्यवहार करते हुए थप्पड़ और मुक्के मारे। वहां मौजूद एक नर्सिंग सहायक ने बीच-बचाव कर स्थिति को संभाला। घटना की जानकारी परिजनों को एक सितंबर को विभाग के एक चिकित्सक के माध्यम से मिली। इसके बाद उन्हें प्रो. लहरी के चोटिल चेहरे के फोटो और वीडियो भी उपलब्ध कराए गए।
मामले को गंभीरता से लेते हुए परिजनों ने ईमेल के माध्यम से बीएचयू के कुलपति, आईएमएस निदेशक और चिकित्सा अधीक्षक से शिकायत की। उन्होंने प्रो. लहरी की विस्तृत चिकित्सकीय जांच कराने और किसी आंतरिक चोट की आशंका की भी जांच कराने की मांग की।
शिकायत मिलने के बाद आईएमएस निदेशक और चिकित्सा अधीक्षक ने आईसीयू पहुंचकर प्रो. टीके लहरी का हाल जाना। बीएचयू प्रशासन ने मामले की जांच के लिए मेडिकल बोर्ड का गठन किया है। बोर्ड के सदस्यों ने आईसीयू पहुंचकर मामले से संबंधित जानकारी जुटानी शुरू कर दी है। अधिकारियों के मुताबिक जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही घटना की पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
बीएचयू अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक प्रो. पुनीत कुमार ने बताया कि परिजनों की शिकायत ईमेल के माध्यम से प्राप्त हुई है। इसके बाद आईएमएस निदेशक के साथ आईसीयू जाकर प्रो. लहरी को देखा गया और मामले की जांच के लिए मेडिकल बोर्ड गठित किया गया है। वहीं, आरोपों को लेकर डॉ. अरविंद पांडेय का पक्ष फिलहाल सामने नहीं आया है।
मरीजों की सेवा के लिए मिला था पद्मश्री
प्रो. टीके लहरी का जन्म 3 जनवरी 1941 को कोलकाता में हुआ था। वह आईएमएस बीएचयू से वर्ष 2003 में सेवानिवृत्त हुए थे। सेवानिवृत्ति के बाद भी उन्होंने मरीजों की सेवा जारी रखी और नियमित रूप से अस्पताल जाकर मरीजों को देखते रहे। मरीजों के प्रति उनके समर्पण और चिकित्सा क्षेत्र में योगदान के लिए उन्हें वर्ष 2006 में पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया गया था। उनकी सादगी और सेवा भावना के लिए उन्हें चिकित्सा जगत में विशेष सम्मान प्राप्त है।

