सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चोलापुर में गंदगी का अंबार
स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही पर उठे सवाल
वाराणसी। सरकार एक ओर आम जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चोलापुर में साफ-सफाई और चिकित्सा सुविधाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। अस्पताल परिसर में जगह-जगह कूड़ा-कचरा जमा होने और शौचालयों में गंदगी के कारण मरीजों तथा उनके तीमारदारों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।


सोशल एक्टिविस्ट मानस दीक्षित ने अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए बताया कि परिसर में जगह-जगह गंदगी का अंबार लगा है। शौचालयों की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है और वहां से उठने वाली दुर्गंध मरीजों एवं तीमारदारों के लिए परेशानी का कारण बन रही है। उन्होंने अस्पताल में चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ की कमी होने का भी आरोप लगाया। इसके अलावा कुछ दवाओं पर उपयोग की अंतिम तिथि अंकित नहीं होने की बात भी सामने रखी गई है।
जिस अस्पताल में मरीजों को स्वस्थ होने की उम्मीद लेकर पहुंचना चाहिए, वहां गंदगी और दुर्गंध की शिकायतें स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े करती हैं। अस्पताल में साफ-सफाई बनाए रखना, कचरे का उचित निस्तारण करना और मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना स्वास्थ्य विभाग की बुनियादी जिम्मेदारियों में शामिल है।
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि अस्पताल की व्यवस्था की निगरानी करने वाले अधिकारी नियमित निरीक्षण कर रहे हैं या नहीं। यदि निरीक्षण किया जा रहा है, तो परिसर में गंदगी, शौचालयों की बदहाल स्थिति और चिकित्सा सुविधाओं से जुड़ी शिकायतों का समाधान क्यों नहीं हो रहा है? हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि और स्वास्थ्य विभाग का पक्ष सामने आना अभी बाकी है।
अस्पताल में इलाज कराने आने वाले मरीज पहले से ही बीमारी और शारीरिक परेशानी से जूझ रहे होते हैं। ऐसे में उन्हें स्वच्छ वातावरण, समय पर उपचार और पर्याप्त चिकित्सा कर्मियों की सुविधा मिलना बेहद जरूरी है। दवाओं पर उपयोग की अंतिम तिथि स्पष्ट रूप से अंकित होने की भी जांच की जानी चाहिए, ताकि मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
सोशल एक्टिविस्ट ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चोलापुर की साफ-सफाई व्यवस्था की तत्काल जांच कराने, शौचालयों की नियमित सफाई सुनिश्चित करने, कचरे का उचित निस्तारण कराने तथा चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ की उपलब्धता की समीक्षा करने की मांग की है।
अब देखना यह है कि स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारी इन शिकायतों का संज्ञान लेकर अस्पताल की व्यवस्था में सुधार के लिए क्या कदम उठाते हैं। जनता को केवल अस्पताल की इमारत नहीं, बल्कि स्वच्छ वातावरण, बेहतर इलाज और जवाबदेह स्वास्थ्य व्यवस्था भी चाहिए।

