तिरुक्कुरल की सीख से जुड़ेगा काशी और तमिलनाडु

तिरुक्कुरल की सीख से जुड़ेगा काशी और तमिलनाडु

28 नवंबर से शुरू होगा काशी तमिल संगमम 5.0,

देशभर के एक हजार शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थी होंगे शामिल

वाराणसी (जनवार्ता)। काशी और तमिलनाडु के सदियों पुराने सांस्कृतिक, आध्यात्मिक एवं सभ्यतागत संबंधों को नई मजबूती देने के लिए काशी तमिल संगमम के पांचवें संस्करण का आयोजन 28 नवंबर से 12 दिसंबर 2026 तक किया जाएगा। इस बार आयोजन की थीम ‘तिरुक्कुरल पयिल्वोम’ यानी ‘तिरुक्कुरल का अभ्यास करें’ रखी गई है। आयोजन की तैयारियों को लेकर मंगलवार को काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक हुई। इसमें केंद्र और प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों सहित विश्वविद्यालय, जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन के अधिकारियों ने भाग लिया।

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बैठक में भारत सरकार के उच्च शिक्षा विभाग की सचिव दीप्ति गौड़ मुखर्जी, बीएचयू के कुलपति प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी, उत्तर प्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा अमित कुमार घोष, शिक्षा मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव अंकिता मिश्रा बुंदेला तथा भारतीय भाषा समिति के अध्यक्ष चमू कृष्ण शास्त्री प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। इसके अलावा वाराणसी के मंडलायुक्त और विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने आयोजन की तैयारियों, विभागीय समन्वय, सुरक्षा, यातायात और अन्य व्यवस्थाओं की समीक्षा की।

तिरुक्कुरल के जरिए सामने आएंगे भारतीय संस्कृति के साझा मूल्य

काशी तमिल संगमम का यह संस्करण संत कवि तिरुवल्लुवर की कालजयी रचना ‘तिरुक्कुरल’ पर केंद्रित होगा। तिरुवल्लुवर के 1,330 कुरल में धर्म, अर्थ और प्रेम के साथ नैतिकता, सदाचार और जीवन मूल्यों की महत्वपूर्ण सीख समाहित है। इसकी सार्वभौमिक प्रासंगिकता को देखते हुए केंद्रीय शास्त्रीय तमिल संस्थान ने इसका अनुवाद संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल सभी 22 भाषाओं में कराया है। इस बार विशेष रूप से युवाओं और शैक्षणिक संस्थानों के माध्यम से तिरुक्कुरल के संदेश को देशभर में पहुंचाने की योजना बनाई गई है।

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एक हजार संस्थानों के विद्यार्थी करेंगे अध्ययन

आयोजन के तहत देश के विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के नोडल संस्थानों के माध्यम से चयनित एक हजार शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थी तिरुक्कुरल का अध्ययन करेंगे। प्रत्येक संस्थान इच्छुक विद्यार्थियों का मूल्यांकन कर मेरिट के आधार पर एक विद्यार्थी का चयन करेगा। चयनित विद्यार्थी अपनी भाषा में आयोजित दो शैक्षणिक व्याख्यानों और एक माह की शोध एवं शैक्षणिक गतिविधियों में भाग लेंगे। उन्हें संकाय पर्यवेक्षक के मार्गदर्शन में चार से पांच पृष्ठ का लेख अथवा शोध टिप्पणी तैयार करनी होगी। साथ ही प्रत्येक विद्यार्थी अपने संस्थान में एक घंटे की प्रस्तुति देकर तिरुक्कुरल के संदेश को अन्य विद्यार्थियों तक पहुंचाएगा।

22 अक्टूबर को शुरू हो चुकी है पंजीकरण प्रक्रिया

काशी तमिल संगमम 5.0 के वेब पोर्टल और पंजीकरण प्रक्रिया का शुभारंभ 22 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रहलाद जोशी ने किया था। आयोजन के क्रियान्वयन में शिक्षा मंत्रालय की प्रमुख भूमिका रहेगी। केंद्रीय शास्त्रीय तमिल संस्थान, चेन्नई पोर्टल, पंजीकरण, चयन प्रक्रिया, बहुभाषी शैक्षणिक अभिविन्यास, डिजिटल संग्रह, ऐप, फिल्मों और प्रकाशनों की जिम्मेदारी संभालेगा। वहीं आईआईटी मद्रास और काशी हिंदू विश्वविद्यालय तमिलनाडु तथा काशी पक्ष के नोडल एवं समन्वयक संस्थान होंगे।

भारतीय रेल, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, संस्कृति मंत्रालय तथा उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु सरकारें भी यात्रा, प्रचार-प्रसार, प्रदर्शनियों और अन्य व्यवस्थाओं में सहयोग करेंगी।

काशी तमिल संगमम का उद्देश्य ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना को मजबूत करना है। गंगा तट की प्राचीन नगरी काशी और वैगई एवं कावेरी नदियों के तट पर विकसित तमिल सभ्यता के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, भाषाई, आध्यात्मिक और शैक्षणिक संबंधों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में यह आयोजन महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

Shiv murti

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