राजस्थान में चुनाव से पहले कांग्रेस को बड़ा झटका,दिग्गज जाट नेता ज्योति मिर्धा हुईं BJP में शामिल

राजस्थान में चुनाव से पहले कांग्रेस को बड़ा झटका,दिग्गज जाट नेता ज्योति मिर्धा हुईं BJP में शामिल
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राजस्थान। राजस्थान का सियासी तापमान विधानसभा चुनाव को लेकर बढ़ा हुआ है। राज्य में इस साल के अंत में चुनाव होंगे, जिसको लेकर बीजेपी और कांग्रेस ने अपनी ताकत झोंक रखी है। वहीं, इससे पहले नेताओं का दल बदलने का सिलसिला भी जारी है।

चुनाव से पहले राजस्थान की राजनीति में बड़ी हलचल
पूर्व कांग्रेस सांसद ने थामा बीजेपी का दामन

नाथूराम मिर्धा की पोती हैं ज्योति
इस बीच चुनाव से पहले राजस्थान में कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। सोमवार (11 सितंबर) को कांग्रेस के दिग्गज जाट नेता रहे नाथूराम मिर्धा की पोती और पूर्व सांसद ज्योति मिर्धा ने बीजेपी में शामिल हो गई हैं। दिल्ली में राजस्थान बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सीपी जोशी की मौजूदगी में पार्टी ज्वॉइन की। उनके साथ पूर्व आईपीएस अधिकारी और कांग्रेस नेता सवाई सिंह ने भी बीजेपी का दामन थाम लिया है।

‘विपरीत दिशा में चली गईं कांग्रेस’
BJP में शामिल होने के बाद ज्योति मिर्धा ने कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 2014 के बाद देश-प्रदेश की परिस्थितियां बदली। पीएम मोदी के कुशल नेतृत्व में हमारे देश की साख वैश्विक स्तर पर एक अलग दिशा में पहुंची,लेकिन कांग्रेस पार्टी विपरीत चली गई। उन्होंने कहा कि पार्टी में हमारी बात कभी सुनी जाती थी और कभी नहीं, क्योंकि कांग्रेस अपने लक्ष्य से भटक गई।

ज्योति मिर्धा ने आगे यह भी कहा कि राजस्थान में महिला अत्याचार, कानून व्यवस्था को लेकर लोग घुटन महसूस कर रहे थे जिसके बाद कांग्रेस छोड़ने का मन बनाया।

जाट समुदाय का बड़ा चेहरा
इसे कांग्रेस के लिए एक बड़ा झटका माना जा सकता है। जाट समुदाय में मिर्धा परिवार का काफी दबदबा है। चुनाव में जाट समुदाय की भूमिका काफी अहम मानी जाती है। ज्योति नाथूराम मिर्धा की पोती हैं, जो कांग्रेस के एक दिग्गज नेता रहे हैं। वे छह बार सांसद और चार बार विधायक बने।

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सांसद रह चुकी हैं ज्योति
बता दें कि ज्योति नागौर से कांग्रेस की सांसद रह चुकी हैं। साल 2009 में उन्होंने नागौर सीट से चुनाव में जीत दर्ज की थी और पहली बार सांसद बनीं। हालांकि फिर लगातार दो बार 2014 और 2019 लोकसभा चुनाव में ज्योति को हार का मुंह देखना पड़ा। 2019 लोकसभा चुनाव में उन्हें राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के मुखिया हनुमान बेनीवाल ने हराया था।


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