शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने यौन उत्पीड़न मामले में हाईकोर्ट से मांगी अग्रिम जमानत
जल्द हो सकती है सुनवाई
प्रयागराज (जनवार्ता): ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती यौन उत्पीड़न और POCSO एक्ट के गंभीर आरोपों में फंस गए हैं। मामले में झूसी थाने में दर्ज FIR के बाद गिरफ्तारी की आशंका से बचने के लिए उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत की याचिका दाखिल की है।

याचिका अधिवक्ताओं राजर्षि गुप्ता, सुधांशु कुमार और श्री प्रकाश के माध्यम से मंगलवार को दायर की गई। सूत्रों के अनुसार, इस पर जल्द सुनवाई होने की संभावना है।
मामला प्रयागराज के झूसी थाने में दर्ज है, जहां स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, उनके शिष्य मुकुंदानंद गिरी और कुछ अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ POCSO एक्ट की धाराओं 3, 4(2), 5, 6, 16, 17 तथा बीएनएस की संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोप माघ मेले और महाकुंभ के दौरान आश्रम में नाबालिग बालकों (14-17 वर्ष) के साथ यौन शोषण से जुड़े हैं।
यह FIR तुलसी पीठाधीश्वर स्वामी रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी (आशुतोष पांडेय) की शिकायत पर स्पेशल POCSO कोर्ट के आदेश के बाद दर्ज हुई। अदालत ने झूसी पुलिस को मुकदमा दर्ज कर जांच के निर्देश दिए थे। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और पीड़ितों के बयान दर्ज करने शुरू कर दिए हैं।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए इसे राजनीतिक साजिश और झूठा बताया है। उन्होंने कहा कि वे जांच का सामना करने को तैयार हैं, लेकिन गिरफ्तारी से बचाव के लिए हाईकोर्ट का रुख किया।
मामले में नया मोड़ तब आया जब शाहजहांपुर के रमाकांत दीक्षित ने दावा किया कि आशुतोष पांडेय ने उनसे संपर्क कर झूठे आरोप लगवाने के लिए पैसे और सुरक्षा का लालच दिया था।
यह विवाद राजनीतिक रूप से भी गरमा गया है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव समेत विपक्षी नेताओं ने योगी सरकार पर दबाव बनाने का आरोप लगाया है। स्वामी ने पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भी तीखे हमले किए थे।
पुलिस जांच जारी है और हाईकोर्ट की सुनवाई के बाद मामले की दिशा स्पष्ट होगी।

