नीतीश ने दिया इस्तीफा तो कैसे बनेगी नई सरकार? कैसा है विधानसभा का आंकड़ा

नीतीश ने दिया इस्तीफा तो कैसे बनेगी नई सरकार? कैसा है विधानसभा का आंकड़ा

बिहार। बिहार में साथी बदले लेकिन सीएम नहीं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ही रहे। अब नीतीश कुमार ने एक बार फिर बिहार की सियासत में उथल-पुथल मचा दी है। नीतीश कुमार ने जेडीयू की बैठक बुलाई है और माना जा रहा है कि वो आरजेडी ने नाता तोड़ एनडीए में शामिल हो सकते हैं। इतना ही नहीं, नीतीश कुमार एक बार फिर मुख्यमंत्री पद की शपथ भी ले सकते हैं। लेकिन, एक बार फिर बदले हुए साथी के साथ। इसको लेकर बिहार में सियासी पारा पूरी तरह गर्म है। हालांकि, इस बीज आरजेडी का दावा है कि आसानी से तख्तापलट नहीं होने दिया जाएगा। बीजेपी भी हालात पर नजर बनाए हुए है।

नीतीश ने दिया इस्तीफा तो कैसे बनेगी नई सरकार?
नीतीश कुमार का लालू यादव से दिल भर गया है। वो एक बार फिर से अपनी प्रवृति का पालन करते हुए बीजेपी के साथ मिलने जा रहे हैं। लेकिन, दिलचस्प बात ये है कि खुद नीतीश कुमार या उनके करीबी इसपर अपना मौन नहीं तोड़ रहे। जैसे-जैसे नीतीश का मौन लंबा होता जा रहा है। लालू खेमे की बेचैनी और बीजेपी का उत्साह दोनों बढ़ता जा रहा है। अब बिहार के ताजा हालात पर हर दल की नजर है। हर खेमा अपनी बैठक कर रहा है। कोशिश यही है कि सियासी शतरंज की एक भी चाल उल्टी ना पड़ जाए। लेकिन क्या आप जानते हैं कि नीतीश कुमार ने इस्तीफा दिया तो नई सरकार कैसे बनेगी और विधानसभा का आंकड़ा कैसा है। चलिए आपको पूरा नंबर गेम बताते हैं।

इस्तीफे के बाद कैसा होगा विधानसभा का आंकड़ा
नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद और जेडीयू के बिना महागठबंधन के पास 115 विधायक रह जाएंगे, जिनमें राजद के 79, कांग्रेस के 19 और लेफ्ट के 16 विधायक शामिल हैं। इसके अलावा ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम के भी 1 विधायक का समर्थन महागठबंधन को है। जबकि, अगर नीतीश एनडीए में चले जाते हैं तो उनके बाद कुल 128 विधायक हो जाएंगे। इसमें बीजेपी के 78, जेडीयू के 45, HAM के 4 और विधायक हैं। इसके अलावा एक नीर्दलीय विधायक का समर्थन भी नीतीश के पास है। बता दें बिहार की 243 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 122 है।

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नीतीश के संपर्क में हैं कांग्रेस के 13 विधायक
इसके साथ ही यह जानकारी भी सामने आ रही है कि कांग्रेस के 19 में से 13 विधायकों के फोन बंद हैं। सूत्रों के अनुसार वो सभी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के संपर्क में हैं। इसके बाद बिहार की सियासी उठापटक में साइलेंट मोड में बैठी कांग्रेस की टेंशन बढ़ गई है। लेकिन, इस बीच पार्टी ने इसे बेबुनियाद बताया है। इस बीच, सूत्रों ने बताया कि सोनिया गांधी, नीतीश को मनाने के लिए आगे आ सकती हैं, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और सोनिया गांधी ने गुरुवार को नीतीश से बात करने की कोशिश की, लेकिन नीतीश उपलब्ध नहीं थे।

तेजस्वी यादव खेमे की नींद भी उड़ी
कांग्रेस के साथ ही तेजस्वी यादव के खेमे की भी नींद उड़ी हुई है, क्योंकि सीएम नीतीश कुमार और आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव के बीच तल्खी बढ़ गई है। इतना ही नहीं, नीतीश कुमार ने लालू यादव का फोन तक उठाना बंद कर दिया है। सूत्रों के अनुसार, पिछले 1 दिन में लालू यादव ने करीब पांच बार नीतीश कुमार को फोन किया है, लेकिन बात करना तो दूर कॉल तक रिसीव नहीं की। इसके अलावा लालू की ओर से मुलाकात का समय मांगा गया था, वो मिलने का समय भी नीतीश कुमार ने लालू यादव को नहीं दिया है।

नीतीश और तेजस्वी यादव के बीच दूरी
बिहार में चल रहे सियासी तूफान के बीच राजभवन में अजीब ही मामला देखने को मिला। कल (26 जनवरी) हुए हाईटी कार्यक्रम के दौरान सीएम नीतीश कुमार बैठे थे। उनके इशारे पर अशोक चौधरी उनके पास पहुंचते हैं। अशोक चौधरी उस कुर्सी पर लगे डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव के नाम की स्लिप को निकालकर फाड़ देते हैं। और फिर वो खुद नीतीश की बगल वाली उसी कुर्सी पर बैठ जाते हैं, जिसपर तेजस्वी के नाम की स्लिप लगी थी। ये पूरा खेल सिर्फ 10 सेकेंड में हो गया। नीतीश और तेजस्वी के बीच दूरी का अनुमान नीतीश के बयान से भी आप लगा सकते हैं। राजभवन से निकलते ही मीडिया ने नीतीश कुमार से पूछा कि तेजस्वी यादव क्यों नहीं आए? इसपर नीतीश कुमार ने कहा कि इस सवाल का जवाब उनसे ही पूछा जाए, जो नहीं आए।

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