साहित्यनाका में सड़क चौड़ीकरण के बीच युवक सहित दो लोगों की मौत के बाद चक्का जाम

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मुआवजे की मांग को लेकर थाने में चली घण्टों पंचायत,एक को पुलिस ने कांधा दिया दूसरे का 7 घण्टे बाद उठी अर्थी

रामनगर (जनवार्ता)। थाना क्षेत्र के साहित्यनाका में सड़क चौड़ी करण में दो लोगों रमेश सेठ और रामसूरत की मौत के बाद बुधवार को नगर के लोगों भारी आक्रोश एवं तनाव व्याप्त होने के चलते पुलिस और जिला प्रशासन के हांथ पाव फूल गये थे।इस बीच दोनों शवों को सड़क पर रखकर लोग सड़क पर धरना देने लगे। सूचना मिलने के बाद एडीएम सिटी आलोक वर्मा, एडीसीपी वरुणा मनीष सांडिल्य, एडीसीपी गोमती सरवन टी,एसीपी भेलूपुर, एसीपी प्रतीक कुमार, एसीपी अमित कुमार पांडेय,थाना प्रभारी निरीक्षक भरत उपाध्याय, सहित कई थाने की फोर्स मौके पर तैनात रही।इस बीच मामले की गम्भीरता को समझते हुए किसी तरह से एक व्यक्ति रामसूरत प्रजापति के शव को थाना प्रभारी निरीक्षक भरत उपाध्याय, एवं एसीपी भेलूपुर ने तत्काल अर्थी को सड़क से उठाकर कांधे पर लेकर श्मशान घाट लेकर चले गये उसके चलते जाम हट तो गया था लेकिन लोगों का आक्रोश कम नहीं हुआ था।इसी दौरान दूसरे युवक की लाश भी ट्रामा सेंटर से उसके साहित्यनाका स्थित घर पहुंचते ही एक बार पुनः मामला विस्फोटक हो गया।व्यापारी नेता राकेश जायसवाल, पूर्व छात्र नेता सिद्धान्त जायसवाल, फारुख भाई,सुरेश बहादुर सिंह, के नेतृत्व में मृतक के घर की महिलाओं ने सड़क जामकर धरने पर वैठ गई। अब प्रशासन के लोगों को समझ में नहीं आ रहा था कि कैसे लोगों को समझाया जाय। धरना दे रहे लोग मृतक के परिवार वालों को नौकरी तथा मुआवजा देने की मांग पर अड़े रहे। डर के कारण घटना स्थल पर कोई भी अधिकारी जाने की हिम्मत नहीं कर रहा था।सभी अधिकारी थाने में ही बैठे रहे।ऐसे में एसीपी भेलूपुर अतुल अंजान और थाना प्रभारी निरीक्षक भरत उपाध्याय, और लक्सा थाना प्रभारी निरीक्षक ने हिम्मत जुटाकर धरना स्थल पर पहुंचे।थाना प्रभारी निरीक्षक रामनगर धरना स्थल पर पहुंचे और उन्होंने व्यापारी नेताओं राकेश जायसवाल, सिद्धान्त जायसवाल के साथ मृतक की पत्नी, पिता,एवं अन्य परिवार के लोगों से मुआवजा सहित अन्य मांग पूरी करने की स्वयं जिम्मेदारी ली और सभी से थाने पर चलकर अधिकारियों के सामने बात करने के लिए राजी किया।तब तक परिवार के लोग लाश नहीं उठाये थे। एडीएम सिटी और पुलिस अधिकारियों ने आम जनता,मृतक के परिवार के लोगों से 4 घण्टे तक की बात चीत की उसके बाद यह निर्णय लिया गया कि दोनों मृतक के परिवार वालों को पी एम आवास,मुख्यमंत्री सहायता कोष से मुआवजा मिलेगा, बृद्धावस्था पेंशन,विधवा पेंशन के अतिरिक्त और लाभ दिलाने की बात कही गई।इस सम्बंध में मौके पर क्षेत्र के लेखपाल को भी बुलाकर मृतक परिवार के लोगों से मिलकर कागजात तैयार करने का निर्देश दिया गया।इसके बाद तकरीबन 7 घण्टे बाद मृतक रमेश सेठ पुत्र भैरव नाथ सेठ के शव को अंत्येष्टि के लिए ले जाया गया।इस दौरान क्षेत्र का माहौल काफी गमगीन हो गया था। इस घटना के बाद लोक निर्माण विभाग ने यह तय किया है कि 35 अवर अभियंता कम्प्यूटर के साथ अतिक्रमण स्थल पर जायेंगे और मौके पर ही अतिक्रमण वाले स्थल की नाप होगी उसी समय मुआवजा निर्धारित कर उन्हें टोकन दिया जायेगा। व्यापारी नेता राकेश जायसवाल ने कहा कि यदि प्रशासन यही काम पहले ही किया होता तो शायद दो मौते नहीं होती।जब कि इसी मांग को लेकर इतना लोगों में आक्रोश था। उन्होंने इसके लिए एडीएम प्रशासन विपिन कुमार सिंह और लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को दोषी ठहराया है। यहां यह बता दें कि साहित्यनाका क्षेत्र के निवासी राममूरत प्रजापति की मुआवजा न मिलने से सदमें में मंगलवार की रात में मौत हो गई थी।उनकी अंत्येष्टि बुधवार को पुलिस के कड़े पहरे में हुई।दूसरे मृतक रमेश सेठ (उम्र 26वर्ष)जो कबाड का काम करता था उसके ऊपर दो दिन पूर्व में सामान हटवाते समय छत से उसके ऊपर आलमारी गिर गया था जिससे उसे चोटे आई थी गम्भीर अवस्था में उसे बीएचयू स्थित ट्रामा सेंटर में भर्ती किया गया था जिसकी बुधवार को तड़के मौत हो गई थी।एक ही क्षेत्र के दो लोगों की मौत के बाद नागरिकों में भारी गुस्सा था ओर वे प्रशासन के खिलाफ सड़क पर उतर आये थे।इस घटना की जानकारी होने के बाद लोक निर्माण विभाग, राजस्व विभाग की टीमें मौके पर जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। नगर में दो मौतों के बाद जिस प्रकार की तनावपूर्ण स्थिति को थाना प्रभारी निरीक्षक भरत उपाध्याय एवं एडीएम सिटी ने अपने बुद्धि विवेक से शांति बहाल कर स्थिति को संभाला उसके लिए पुलिस प्रशासन ने उनकी पीठ थपथपाई।

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