ट्रैफिकिंग गिरोह के चंगुल से 2 साल के मासूम को मुक्त कराया
चार गिरफ्तार
चंदौली (जनवार्ता) । रेलवे स्टेशन की सीढ़ियों के नीचे सोते परिवार से मात्र कुछ घंटों में अपहरण कर लिए गए दो वर्षीय मासूम बच्चे को सुरक्षा बलों ने त्वरित कार्रवाई से ट्रैफिकिंग गिरोह के कब्जे से छुड़ा लिया। बच्चे को दूध में अल्प्राजोलम (अल्प्रासेन) जैसी नशीली दवा मिलाकर बेहोश किया गया था, जो वयस्कों के लिए चिंता-निवारक दवा है लेकिन छोटे बच्चों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है।

पं. दीन दयाल उपाध्याय रेलवे स्टेशन (मुगलसराय) पर रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ), सरकारी रेलवे पुलिस (जीआरपी) और गैर-सरकारी संस्था एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन (एवीए) की संयुक्त टीम ने सुबह साढ़े दस बजे संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखते हुए चार आरोपियों को दबोच लिया। इनमें एक महिला भी शामिल है। कुल छह आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है।
प्रारंभिक पूछताछ में आरोपियों ने कबूल किया कि उन्होंने तड़के करीब पांच बजे स्टेशन की सीढ़ियों पर सो रहे रोहतास (बिहार) निवासी परिवार के दो वर्षीय बच्चे का अपहरण किया था। ट्रेन आने तक बच्चे को झाड़ियों में छिपाकर रखा गया। रोने से शक न हो, इसलिए दूध में नशीली दवा मिलाकर पिलाई गई। गिरोह का इरादा बच्चे को बिहार के मुजफ्फरपुर ले जाकर किसी नर्सिंग होम में 20 हजार रुपये या उससे अधिक में बेचना था। जांच में पता चला कि यह गिरोह अब तक आठ बच्चों की तस्करी कर चुका है।
आरोपियों के पास से डायपर, ऊनी टोपी, दूध की बोतल, नए कपड़े, दूध के पैकेट और नशीली दवा बरामद हुई। पुलिस ने उनकी निशानदेही पर बच्चे को सुरक्षित बरामद कर उसके माता-पिता को सौंप दिया, जिन्होंने तुरंत पहचान की। बच्चे को चंदौली जिले की बाल कल्याण समिति के सुपुर्द किया गया है।
एवीए के वरिष्ठ निदेशक मनीष शर्मा ने बताया, “बच्चों की ट्रैफिकिंग एक संगठित अंतरराज्यीय अपराध है। गिरोह अपहरण से लेकर गंतव्य तक की पूरी कड़ी में सक्रिय रहते हैं। बच्चे वेश्यालयों, जबरन विवाह, अवैध गोद लेने, अंग व्यापार या अन्य अमानवीय गतिविधियों में धकेले जा सकते हैं। मुजफ्फरपुर के कुछ अस्पतालों के नाम पहले भी सामने आए हैं, इसलिए मामले की गहन जांच जरूरी है।”

