आपके बच्चे को है ऑनलाइन गेमिंग की लत तो सावधान! राजस्थान में 15 साल के छात्र की खराब हुई आंख

आपके बच्चे को है ऑनलाइन गेमिंग की लत तो सावधान! राजस्थान में 15 साल के छात्र की खराब हुई आंख

नई दिल्ली। इन दिनों ऑनलाइन गेम का चलन बहुत ज्यादा हो गया है। क्या बच्चे,क्या बुजुर्ग हर वर्ग के लोग इसकी लत में जकड़े हैं। ऑनलाइन गेम की लत से बच्चों के दिमाग में गहरा असर पड़ता है। इसका ताजा मामला सामने आया है, जोकि बेहद खौफनाक है। अलवर शहर के मुंगसका में रहने वाले 15 साल के बच्चे पर इसका बुरा असर पड़ा है। बात इतनी बिगड़ी की गेम की लत से जकड़े इस व्यक्ति के जान पर बन आई।

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ऑनलाइन गेम खेलने वाले हो जाओ सावधान!
15 साल के लड़के का मानसिक संतुलन बिगड़ा
खाना खाते-खाते और नींद में भी गेम खेलता

ऑनलाइन गेम की वजह से बच्चे का मानसिक संतुलन बिगड़ा
पीड़ित बच्चे की उम्र महज 15 वर्ष है। गेम खेलते-खेलते उसका मानसिक संतुलन बिगड़ने के साथ-साथ आंख भी खराब हो गई। पीड़ित बच्चे के पिता ने बताया कि लगभग 6 से 7 महीने पहले बच्चा लगातार पबजी खेल रहा था। जब भी घर का फोन खाली मिलता वो पबजी खेलने लगता। इस बीच बच्चे को गेम की गंदी लत लग गई। जब घरवाले गेम खेलने के लिए मना करते तो मोहल्ले में चला जाता,या फिर रजाई के अंदर गेम खेलता था। इस दौरान बच्चा पबजी गेम के जकड़ में आ गया।

24 घंटे में 12 घंटे खेलने लगा गेम
बच्चे के पिता ने बताया कि पहले तो 4 से 5 घंटे गेम खेलता था। लेकिन धीरे-धीरे हर वक्त केवल गेम ही खेलने लगा था। पिता के अनुसार बच्चा 24 घंटे में 10 से 12 घंटे केवल गेम ही खेलता था। पिता ने बताया कि धीरे-धीरे इसका मानसिक संतुलन बिगड़ने लगा। उससे मोबाइल लेने की कोशिश करते तो वो चिड़िचिड़ाने लगता और गुस्सा करने लगाता था।

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ऑनलाइन गेम ने खराब की आंख
पीड़ित बच्चे के पिता ने बताया कि कुछ दिन बाद उसकी आंखों में भी बदलाव हुआ। इसके बाद डॉक्टर को दिखाया तो पता चला कि वो पबजी का शिकार है। उसे अब घर में बांध कर रखना पड़ता है,लेकिन मौका मिलते ही घर से भाग जाता है। पिता ने बताया कि बच्चा घर से दो बार रेवाड़ी व एक बार बानसूर भाग चुका है।

स्पेशल चाइल्ड केयर हॉस्टल में कराया भर्ती
पिता ने बताया कि धीरे-धीरे हालत इतनी खराब होती जा रही कि उसकी उंगलियां और शरीर का कोई भी अंग अपने आप हिलने लगता है। उसकी खराब हालत के बाद उसे 15 दिनों के लिए स्पेशल चाइल्ड केयर हॉस्टल में रखा। जहां देखभाल और दवाई के बाद थोड़ा हालत में सुधार हुआ है। बच्चे की हालत से पूरा घर परेशान है। पिता एक ऑटो चालक हैं और मां घर में झाड़ू पोछा लगाती हैं।

Shiv murti

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