गाज़ा पीस डील पर PM मोदी ने की ट्रंप की तारीफ

गाज़ा पीस डील पर PM मोदी ने की ट्रंप की तारीफ

क्या कम होगी भारत-अमेरिका के बीच खटास?

rajeshswari

नई दिल्ली/वॉशिंगटन। मध्य पूर्व की भू-राजनीति में एक अहम मोड़ आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मध्यस्थता से हमास ने ‘गाज़ा शांति योजना’ (Gaza Peace Plan) के तहत सभी इज़रायली बंधकों — चाहे जीवित हों या मृत — को रिहा करने की घोषणा की है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब गाज़ा में युद्धविराम की मांग को लेकर अंतरराष्ट्रीय दबाव लगातार बढ़ रहा था। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस पहल का स्वागत करते हुए ट्रंप की सराहना की और इसे “मध्य पूर्व में स्थिरता और सुलह की दिशा में बड़ा कदम” बताया।

मोदी ने अपने संदेश में लिखा कि राष्ट्रपति ट्रंप के नेतृत्व में गाज़ा में शांति की कोशिशें निर्णायक मोड़ पर हैं और बंधकों की रिहाई की संभावना एक बड़ा संकेत है। उन्होंने कहा कि भारत हमेशा टिकाऊ और न्यायपूर्ण शांति के हर प्रयास का समर्थन करेगा।

इससे पहले ट्रंप ने हमास को चेतावनी देते हुए कहा था कि यदि 5 अक्टूबर शाम 6 बजे तक शांति समझौते पर सहमति नहीं बनी तो उसके गंभीर परिणाम होंगे। इसी दबाव के बीच हमास ने पहली बार सार्वजनिक रूप से बातचीत के लिए तत्परता दिखाई और गाज़ा प्रशासन को एक ‘टेक्नोक्रेटिक फिलिस्तीनी निकाय’ को सौंपने की पेशकश की। हैरानी की बात यह रही कि हमास ने न सिर्फ अरब देशों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय बल्कि ट्रंप के प्रयासों की भी प्रशंसा की।

इसके बाद ट्रंप ने इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात कर एक 20 सूत्रीय शांति योजना प्रस्तुत की, जिस पर नेतन्याहू ने सहमति जताई। इस योजना के तहत गाज़ा के भविष्य के लिए एक नया ‘शांति बोर्ड’ गठित किया जाएगा, जिसकी अध्यक्षता ट्रंप स्वयं करेंगे। इसमें अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों, फिलिस्तीनी प्रतिनिधियों और ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर को शामिल किया जाएगा। स्पष्ट शर्त यह रखी गई कि इसमें हमास या किसी भी उग्रवादी गुट को शासन में कोई भूमिका नहीं दी जाएगी। ट्रंप ने अपने सोशल प्लेटफ़ॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर इज़रायल से तत्काल बमबारी रोकने की अपील भी की, ताकि बंधकों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।

इसे भी पढ़े   जौनपुर में डबल मर्डर: बाइक सवार बदमाशों ने दो सगे भाइयों को गोली मारकर उतारा मौत के घाट

अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया मिश्रित रही। कनाडा ने कहा कि अब “वादों को हकीकत में बदलने का समय है”, जबकि संयुक्त राष्ट्र ने स्थायीh युद्धविराम और मानवीय राहत की अपील दोहराई। फ्रांस और क़तर ने इसे सकारात्मक कदम बताया, लेकिन भरोसे और जवाबदेही पर जोर दिया।

दिलचस्प यह है कि गाज़ा शांति प्रक्रिया में तालमेल दिखाने के बावजूद भारत और अमेरिका के रिश्तों में पिछले महीनों में खटास भी देखने को मिली है। अगस्त 2025 में ट्रंप ने भारतीय निर्यातों पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया था, यह कहते हुए कि व्यापार असंतुलन और रूस से तेल खरीद को लेकर चिंताएं हैं। हालांकि, इसी बीच नरमी के संकेत भी दिखाई दिए। सितंबर में ट्रंप ने मोदी को उनके 75वें जन्मदिन पर कॉल किया और अक्टूबर में प्रधानमंत्री मोदी का गाज़ा शांति संदेश अपने प्लेटफॉर्म पर रीपोस्ट भी किया। इससे संकेत मिलता है कि मतभेदों के बावजूद दोनों देश रणनीतिक रिश्तों को पटरी पर रखने की कोशिश कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल ट्रंप का राजनीतिक मास्टरस्ट्रोक साबित हो सकती है। अगर बंधकों की रिहाई और युद्धविराम सफल होता है तो चुनावी साल में यह उनके लिए बड़ी उपलब्धि होगी। लेकिन सवाल यह भी है कि क्या हमास अपने वादे पर कायम रहेगा और क्या इज़रायल इस प्रस्ताव को व्यावहारिक रूप में स्वीकार करेगा। इस समझौते को लेकर अभी भी संदेह कायम है।

भारत के लिए यह स्थिति बेहद अहम है, क्योंकि पश्चिम एशिया में स्थिरता का सीधा संबंध भारत की ऊर्जा सुरक्षा और वहां बसे लाखों प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा से है। इसलिए मोदी सरकार का इस पहल का समर्थन करना सिर्फ कूटनीतिक औपचारिकता नहीं बल्कि रणनीतिक आवश्यकता भी है।

इसे भी पढ़े   Lucknow News: शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थि 66 दिन से दे रहे थे धरना,किया सीएम आवास के घेराव का प्रयास

कुल मिलाकर, दुनिया उम्मीद और संशय के बीच खड़ी है। ट्रंप इसे अपनी जीत साबित करना चाहते हैं, हमास दबाव में झुकता दिख रहा है और भारत अपने संतुलित रुख के साथ वैश्विक राजनीति में गंभीर खिलाड़ी के रूप में उभर रहा है। असली इम्तिहान अब यही है — क्या यह समझौता कागज़ से निकलकर ज़मीन पर भी शांति लाएगा?

Shiv murti

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *