रामगढ़–शाहगंज मार्ग को स्टेट हाईवे बनाने पर सियासी घमासान, व्यापारियों के अस्तित्व पर संकट का आरोप
सोनभद्र (जनवार्ता)। कोरोना काल में रामगढ़–शाहगंज–घोरावल मार्ग को स्टेट हाईवे घोषित किए जाने के फैसले को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। समाजवादी पार्टी ने भाजपा पर चुनावी लाभ के लिए बाईपास का झूठा सपना दिखाने और अब व्यापारियों को भारी नुकसान की ओर धकेलने का गंभीर आरोप लगाया है।

सपा के राष्ट्रीय सचिव अविनाश कुशवाहा ने कहा कि जब कोरोना महामारी के दौरान लोग घरों में बंद थे, उसी समय भाजपा सरकार ने रामगढ़–शाहगंज–घोरावल मार्ग को स्टेट हाईवे घोषित कर दिया। इस फैसले का शाहगंज, रॉबर्ट्सगंज, रामगढ़ और खलियारी के व्यापारियों ने तीखा विरोध किया। व्यापार पूरी तरह चौपट होने के डर से रॉबर्ट्सगंज के व्यापारियों ने आंदोलन तक शुरू कर दिया था।
व्यापारियों की नाराजगी और संभावित वोट बैंक के नुकसान को देखते हुए भाजपा ने नगर के बाहर से बाईपास बनाने का शोर मचाया। विधानसभा और नगरपालिका चुनाव बीत गए, लेकिन आज तक किसी भी बाईपास को स्वीकृति नहीं मिली। आरोप है कि चुनावी लाभ के लिए भाजपा ने तीन बार अलग-अलग मार्गों से बाईपास का सपना दिखाया, जबकि जमीनी हकीकत में व्यापारियों की समस्या जस की तस बनी रही।
सपा नेता ने यह भी आरोप लगाया कि बाईपास के नाम पर सत्ता से जुड़े प्लाटरों ने जमीनों की प्लाटिंग कर बिक्री की, लेकिन अब सामने आया है कि बाईपास स्वीकृत ही नहीं हुआ। हाल ही में रॉबर्ट्सगंज से शाहगंज होते हुए कलवारी तक स्टेट हाईवे के प्रथम चरण का टेंडर पास होने की सूचना ने व्यापारियों की चिंता और बढ़ा दी है।
अविनाश कुशवाहा का कहना है कि यदि यह परियोजना मौजूदा स्वरूप में लागू हुई तो रॉबर्ट्सगंज में हजारों मकान और दुकानें उजड़ सकती हैं। नजूल भूमि के कारण सैकड़ों लोगों को मुआवजा तक नहीं मिलेगा। उन्होंने इसके लिए भाजपा को पूरी तरह जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि पार्टी व्यापारियों को सिर्फ वोट बैंक समझती है। सपा ने ऐलान किया कि वह व्यापारियों की इस लड़ाई को जोरदार तरीके से लड़ेगी।

