शाह बोले-मोदी भगवान शंकर की तरह 18-19 साल विषपान करते रहे,अब सत्य सोने जैसा चमक रहा है

शाह बोले-मोदी भगवान शंकर की तरह 18-19 साल विषपान करते रहे,अब सत्य सोने जैसा चमक रहा है

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात दंगे मामले में जाकिया जाफरी की SIT रिपोर्ट के खिलाफ दी गई अर्जी शुक्रवार को खारिज कर दी थी। फैसले के बाद न्यूज एजेंसी ANI ने गृहमंत्री अमित शाह से बात की, जिसे शनिवार को रिलीज किया गया।

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इसमें शाह ने कहा कि कोर्ट के फैसले ने सिद्ध कर दिया कि तब के गुजरात सरकार पर लगाए सभी आरोप पॉलिटिकली मोटिवेटेड थे। जिन लोगों ने भी मोदी जी पर आरोप लगाए थे, उन्हें भाजपा और मोदी जी से माफी मांगनी चाहिए। करीब 40 मिनट के इंटरव्यू में शाह ने कहा कि PM मोदी ने हमेशा न्यायपालिका में विश्वास रखा है।

इंटरव्यू का बड़ा और अहम हिस्सा…
सवालः कोर्ट ने मोदी जी और सभी आरोपियों को क्लीन चिट दे दी है, ताे आपको कैसा लग रहा है? आप तब MLA थे?
जवाब: सबसे पहले क्लीन चिट की बात करूंगा। सुप्रीम कोर्ट ने सभी आरोपों को खारिज किया है। और आरोप क्यों गढ़े गए इस पर भी सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट ने सिद्ध किया है कि ये आरोप पॉलिटिकली मोटिवेटिड थे। 18- 19 साल की लड़ाई में देश का इतना बड़ा नेता एक शब्द बोले बगैर सभी दुखों को भगवान शंकर के विषपान की तरह गले में उतारकर, सहनकर लड़ता रहा। मैंने मोदी जी को नजदीक से इस दर्द को झेलते हुए देखा है। मजबूत मन का आदमी ही ऐसा स्टैंड ले सकता है।

सवाल: पॉलिटिकल व्यू की वजह से गुजरात दंगों के दौरान पुलिस और ब्यूरोक्रेसी ज्यादा कुछ नहीं कर पाई?

जवाब: भाजपा की विरोधी राजनीतिक पार्टियां, कुछ आइडियोलॉजी लिए राजनीति में आए हुए पत्रकार और कुछ NGOs ने मिलकर इन आरोपों को इतना प्रचारित किया। इनका इकोसिस्टम इतना मजबूत था कि धीरे धीरे झूठ को ही सब सच मानने लगे।

सवाल: उस वक्त तो आपकी सरकार दिल्ली और गुजरात दोनों जगह थी, तो फिर इन लोगों का नेटवर्क इतना मजबूत कैसे था?

जवाब: हमारी सरकार का कभी भी मीडिया के काम में दखल देने का ऐटीट्यूड ही नहीं है। उस वक्त जो इकोसिस्टम बना था, उसने एक झूठ को इतना हौव्वा बनाकर जनता के सामने पेश किया कि सब झूठ को ही सच मानने लगे थे।

सवाल: अगर सरकार सही थी तो SIT की क्या जरूरत थी?
जवाब: SIT का ऑर्डर कोर्ट का नहीं था। एक NGO ने SIT की मांग की थी। हमारी सरकार ने कहा कि हमें SIT से कोई परेशानी नहीं हैं। आज जब जजमेंट आया है, तो यह तय हो गया है कि एक पुलिस ऑफिसर, एक NGO और एक पॉलिटिकल पार्टी ने सनसनी के लिए झूठी बातों को फैलाया था। झूठे सबूत गढ़े गए, SIT के सामने झूठे जवाब दिए गए। कोर्ट के फैसले ने यह सिद्ध कर दिया कि दंगा रोकने के लिए सरकार ने भरसक प्रयास किए। CM ने भी दंगा रोकने की अपील की थी।

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सवाल: लेकिन दंगों के सिर्फ आरोप तो नहीं लगे थे? दंगे भी तो हुए थे…
जवाब: आरोप यह था कि दंगे मोटिवेटेड थे, दंगों में राज्य सरकार का हाथ था। दंगों में CM का हाथ होने के भी आरोप लगाए गए। दंगे से कौन इनकार कर रहा है। देश में दंगे कई जगह पर हुए। जहां तक दंगों का सवाल है, कांग्रेस के शासन के किन्हीं 5 सालों और भाजपा के शासन के किन्हीं 5 सालों की तुलना करके देख लीजिए। कितने घंटे कर्फ्यू रहा, कितने लोग मारे गए, कितने दिन बंद रहा और दंगा कितने दिन तक चला इन बातों की तुलना करने पर पता चल जाएगा कि दंगे किसके शासनकाल में अधिक हुए।

दंगा होने का मूल कारण गुजरात में एक ट्रेन को जला देना था। 60 लोगों को और 16 दिन की बच्ची को उसकी मां की गोद में बैठे हुए जिंदा जलते हुए मैंने देखा है, मेरे हाथ से मैंने अंतिम संस्कार किया है। इसके कारण दंगे हुए और आगे जो दंगे हुए वो राजनीति से प्रेरित होकर हुए थे। सरकार के खिलाफ किया गया स्टिंग ऑपरेशन भी पॉलिटिकली मोटिवेटेड था, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया।

सवाल: 3 दिन तक सेना को बुलाया नहीं गया, अगर आप उस वक्त गृह मंत्री होते तो क्या आप सेना को जल्दी नहीं बुलाते?

जवाब: जिस दिन गुजरात बंद का ऐलान हुआ, उसी दोपहर को हमने सेना को बुला लिया था। सेना को पहुंचने में थोड़ा समय लगता है। जहां तक गुजरात सरकार का सवाल है, एक दिन की भी देरी नहीं हुई थी। इस बात को कोर्ट ने भी माना और एप्रिशिएट किया है।

लेकिन दिल्ली में सेना का मुख्यालय है। जब इतने सारे सिख भाइयों को मार दिया गया, 3 दिन तक कुछ नहीं हुआ। कितनी SIT बनी? हमारी सरकार आने के बाद SIT बनी। इतने सालों तक सिख नरसंहार में विपक्ष की सरकारों के दौरान कभी गिरफ्तारियां नहीं हुईं। ये लोग हम पर आरोप लगा रहे हैं?

सवाल: आप और मोदी जी कहते हैं कि गुजरात पर एक दंगाई राज्य का टैग लगाने का झूठा प्रयास किया गया?

जवाब: यह बात केवल मैं और मोदी जी नहीं कहते, अब सुप्रीम कोर्ट भी यही कहता है कि गुजरात पर एक दंगाई राज्य का टैग लगाने का झूठा प्रयास किया गया। आप लोकतंत्र में संविधान और सुप्रीम कोर्ट को भी नहीं मानेंगे, पॉलिटिकल स्टेटमेंट सच्चे हैं या सुप्रीम कोर्ट का फैसला यह देश की जनता को तय करना होगा। अब आरोप लगाने वालों से पत्रकारों को पूछना चाहिए कि ये आरोप किस आधार पर लगाए गए थे। अगर आधार था तो वे लोग सुप्रीम कोर्ट क्यों नहीं गए।

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सवाल: आपने NGOs का जिक्र किया,कौन से NGOs हैं? क्या किया उन्होंने?
जवाब: मैंने बहुत जल्दबाजी में जजमेंट को पढ़ा है, लेकिन इसमें तीस्ता सीतलवाड़ का नाम बहुत स्पष्ट दिया है। तीस्ता सीतलवाड़ के NGO ने हर थाने में भाजपा के कार्यकर्ता को शामिल करने वाली ऐप्लिकेशन दी थी। मीडिया का दबाव इतना था कि ऐसी ऐप्लिकेशन को सच मान लिया गया। जनता ने कभी इन आरोपों को स्वीकारा नहीं। लेकिन मीडिया, NGO और हमारी विरोधी पॉलिटिकल पार्टियों के त्रिकूट ने भाजपा के खिलाफ गलत आरोपों को चलाया।

सवाल: बहुत से लोगों का मानना है कि भाजपा ने SIT को प्रभावित किया था…
जवाब: SIT और जांच अफसर की नियुक्ति देश की सर्वोच्च अदालत ने NGO को सुनने के बाद की थी। इन अफसरों को केंद्र सरकार की ओर से भेजा गया था। उस समय तक केंद्र में UPA सरकार आ चुकी थी। हमने SIT को जरा भी प्रभावित नहीं किया। इतनी सारी गलत बातें फैलाई गईं कि फायरिंग में केवल मुसलमान मारे गए। ऐसा नहीं हुआ है।

सवाल: फायरिंग में मुसलमान नहीं मारे गए, लेकिन दंगों में तो मारे गए न?

जवाब: जिस तरह से 60 लोगों को जिंदा जला दिया था, उसका समाज में आक्रोश था। और जब तक दंगे नहीं हुए भाजपा को छोड़कर किसी भी पार्टी ने ट्रेन जलाने वाली घटना की निंदा नहीं की। उस समय संसद चल रही थी। किसी ने भी 60 लोगों को जिंदा जलाने की घटना का दुख भी व्यक्त नहीं किया, निंदा तक नहीं की गई।

सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा कि जकिया जाफरी किसी और के निर्देश पर काम करती थीं। NGO ने कई पीड़ितों के हलफनामे पर साइन किए और पीड़ितों को पता भी नहीं है। सब जानते हैं कि तीस्ता सीतलवाड़ की NGO ये सब कर रही थी और उस समय की आई UPA की सरकार ने तीस्ता सीतलवाड़ और उनके NGO की बहुत मदद की है। केवल मोदी जी की छवि को खराब करने के लिए यह सब किया गया।

सवाल: लेकिन उन लोगों पर दंगा कराने का लेबल नहीं लगा?
जवाब: लेबल फैक्ट के आधार पर थोड़े ही लगाए जाते हैं। दंगों का पॉलिटिकल उपयोग कभी करना ही नहीं चाहिए। गुजरात में जब भी इन्वेस्टमेंट समिट होता था, हर अखबार में दंगों पर आर्टिकल छापे जाते थे। यह काम 10-12 साल तक किया गया। मोदी जी जब भी विदेश जाते थे, उन्हें अपमानित करने के लिए विदेशी अखबारों में आर्टिकल छपवाए गए।

सवाल: सुप्रीम कोर्ट का फैसला भाजपा और मोदी जी के लिए इतना अहम क्यों है? क्या आपको कोई पछतावा है?

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जवाब: ये 18-19 साल लंबी लड़ाई मोदी जी और सत्य खोजने वाले लोगों ने लड़ी है। किसी भी झूठ को एक्सपोज करना बहुत जरूरी होता है, इतिहास तो अपने आप बनते रहते हैं। मैं मानता हूं यह फैसला भाजपा के हर कार्यकर्ता के लिए गौरव का विषय है।

सवाल: भाजपा बिना मुसलमानों के वोट के सरकार बना सकती है, ऐसा आरोप पॉलिटिकल पार्टियां लगाती हैं, गुजरात लैबोरेटरी टर्म का इस्तेमाल किया जाता है, इस पर क्या कहेंगे?

जवाब: यह आपके देखने का नजरिया है। गुजरात मॉडल जरूर बना है। देश में हमने सबसे पहले 24 घंटे बिजली पहुंचाई। देश के अंदर 12 साल में जीरो ड्रॉपआउट रेश्यो और प्राथमिक शिक्षा में 99% से अधिक बच्चों का नामांकन सुनिश्चित किया। लगातार 12 साल तक हमने 10% एग्रीकल्चर ग्रोथ रेट अचीव किया है। यह भी एक मॉडल है।

सवाल: जब वह गोधरा से अंतिम संस्कार के लिए बॉडीज लेकर गए थे, तब आपको लगा था कि कोई प्रतिक्रिया होगी?

जवाब: उस वक्त कोई भी इस बारे में सोच ही नहीं पाया था, क्योंकि सबसे बड़ा सवाल 59 लोगों के अंतिम संस्कार का था। कोई ऐसा इनपुट नहीं था कि इतनी बड़ी संख्या में रिएक्शन आ जाएगा।

सवाल: उस दिन हास्पिटल में आपने क्या देखा? अगर आप होम मिनिस्टर होते तो क्या अलग करते?

जवाब: उस दिन अस्पताल में मैने जली हुई बॉडीज देखी। जो भी जिम्मेदार लोग थे उन्होंने दंगा रोकने को लेकर अच्छा काम किया था, लेकिन घटना की वजह से रोष इतना था कि इसकी भनक किसी को नहीं लग पाई और बाद में इस पर किसी का कंट्रोल नहीं रहा।

सवाल: विपक्ष का आरोप है कि राजनीतिक फायदे के लिए आप दंगे होने देते हैं…

जवाब: जहां-जहां आज हमारी सरकार है, वहां कांग्रेस, सपा, बसपा और वाम दलों की सरकारें रह चुकी हैं। भाजपा के शासन के दौरान दंगों का औसत और इनमें हताहत होने वाले लोगों का औसत बाकियों के शासन वाले औसत से कम है। भाजपा के शासन में दंगे कम होते हैं। अगर भाजपा को दंगों से फायदा होता तो हम इसे ज्यादा कराते।

सवाल: 20 साल पहले अगर आपको देखना पड़े, तो मोदी जी ने उस दौरान क्या नहीं किया, जो वह कर सकते थे..

जवाब: उन्होंने सब कुछ किया, इतने डिटेल में शायद ही किसी CM ने काम किया होगा। एक थाने की क्षमता 100 से 150 पुलिस की होती है। एडिशनल फोर्स के साथ यह संख्या 400 पुलिस की होगी। 2 लाख लोगों की जमघट के सामने आप क्या कर सकते हैं। सरकार को व्यवस्था करने में थोड़ा समय लगता है।

Shiv murti

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