शंकराचार्य की यात्रा रोकने की मांग को लेकर पॉक्सो कोर्ट पहुंचे आशुतोष महाराज

शंकराचार्य की यात्रा रोकने की मांग को लेकर पॉक्सो कोर्ट पहुंचे आशुतोष महाराज

प्रयागराज (जनवार्ता)। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की ‘गौ प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध यात्रा’ को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी क्रम में आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने सोमवार को प्रयागराज की स्पेशल पॉक्सो कोर्ट में वाद दाखिल कर यात्रा को रोकने की मांग की।

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याचिका में कहा गया है कि शंकराचार्य को सीतापुर पहुंचने से रोका जाए, क्योंकि उनके खिलाफ बयान दर्ज कराने वाले बटुक पड़ोसी जिले हरदोई के निवासी हैं और यात्रा के कारण वे दहशत में हैं। उल्लेखनीय है कि इसी अदालत में आशुतोष महाराज ने शंकराचार्य पर बटुकों के यौन उत्पीड़न का मामला दर्ज कराया था।
दरअसल, शंकराचार्य ने 7 मार्च को काशी से ‘गौ प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध यात्रा’ की शुरुआत की थी। यह यात्रा रायबरेली और उन्नाव होते हुए सोमवार शाम सीतापुर पहुंचने वाली है। गाय को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग को लेकर निकली यह यात्रा 11 मार्च को लखनऊ में समाप्त होगी।
ट्रेन में हमले के मामले में FIR दर्ज
उधर, आशुतोष महाराज पर रविवार को चलती ट्रेन में हुए जानलेवा हमले के मामले में पुलिस ने अज्ञात हमलावरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। घटना के समय ट्रेन में मौजूद चार यात्रियों से पूछताछ की गई है, हालांकि अभी तक कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
जानकारी के अनुसार, आशुतोष महाराज रीवा एक्सप्रेस से गाजियाबाद से प्रयागराज जा रहे थे। उनका आरक्षण एसी फर्स्ट कोच में था। सिराथू रेलवे स्टेशन के पास सुबह करीब पांच बजे जब वे टॉयलेट के लिए उठे, तभी एक अज्ञात व्यक्ति ने उन पर धारदार हथियार से हमला कर दिया। हमलावर ने उनकी नाक काटने की कोशिश की और चेहरे तथा हाथ पर कई वार किए। किसी तरह बचकर उन्होंने ट्रेन के टॉयलेट में खुद को बंद कर लिया और जीआरपी को सूचना दी।
शंकराचार्य पर लगाया हमला करवाने का आरोप
हमले के बाद आशुतोष महाराज ने आरोप लगाया था कि यह हमला शंकराचार्य की ओर से करवाया गया है, ताकि वे कोर्ट में सबूत पेश न कर सकें। उनका कहना था कि आरोपों से बचने के लिए उन पर हमला कराया गया।
रामभद्राचार्य के शिष्य हैं आशुतोष महाराज
आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज मूल रूप से शामली जिले के कांधला कस्बे के रहने वाले हैं। वे जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य हैं और 2022 में उनसे दीक्षा लेने के बाद संन्यासी जीवन अपना चुके हैं। वर्तमान में वे कांधला स्थित प्राचीन शाकुंभरी सिद्धपीठ मंदिर की कमेटी से जुड़े हुए हैं और मंदिर प्रबंधन की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं।
माघ मेले के दौरान शुरू हुआ विवाद
शंकराचार्य और आशुतोष महाराज के बीच विवाद की शुरुआत प्रयागराज के माघ मेले में हुई थी। 24 जनवरी को आशुतोष महाराज ने पुलिस कमिश्नर से शिकायत करते हुए माघ मेला-2026 और महाकुंभ-2025 के दौरान बच्चों के यौन शोषण के आरोप लगाए थे। पुलिस पर कार्रवाई न करने का आरोप लगाते हुए उन्होंने 8 फरवरी को स्पेशल पॉक्सो कोर्ट में याचिका दायर की थी।
बाद में अदालत के आदेश पर झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज की गई, जिसमें शंकराचार्य, उनके शिष्य मुकुंदानंद और दो-तीन अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया।
शंकराचार्य ने आरोपों को बताया निराधार
उधर, हमले के बाद शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उनका कहना था कि जो व्यक्ति शुरुआत से जांच के लिए तैयार है, वह हमला क्यों करवाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि यात्रा को लेकर मीडिया का ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं।

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Shiv murti

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