वीर लोरिक-मंजरी की अमर प्रेमगाथा, मारकुंडी घाटी में गूंजता सच्चे प्यार का संदेश
सोनभद्र (जनवार्ता)! वैलेंटाइन डे के इस रोमांचक मौके पर उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले की मारकुंडी घाटी सदियों पुरानी एक प्रेम कहानी से फिर गुलजार हो उठी है। वीर लोरिक और मंजरी की लोकगाथा, जो त्याग, साहस और अटूट विश्वास की मिसाल है, आज भी युवा जोड़ों को प्रेरित कर रही है। यह कहानी सिर्फ प्रेम की नहीं, बल्कि अन्याय के खिलाफ लड़ाई की भी गौरवशाली दास्तां है।


जनश्रुतियों के अनुसार, बलिया के गौरा गांव के वीर योद्धा लोरिक का प्रेम सोनभद्र के अगोरी राज्य की सुंदर मंजरी से था। अत्याचारी राजा मोलागत ने मंजरी पर बुरी नजर डाल ली और जबरन विवाह का प्रयास किया। मंजरी ने संकट में लोरिक को संदेश भेजा। अन्याय के विरुद्ध हमेशा खड़े रहने वाले लोरिक ने तुरंत हथियार उठाया। अपनी प्रसिद्ध 400 किलो की तलवार ‘बिजुरिया’ से लोरिक ने राजा मोलागत को युद्ध में परास्त कर मार गिराया और मंजरी को मुक्ति दिलाई।

दोनों ने विवाह किया और सुखपूर्वक जीवन शुरू किया।
विवाह के बाद बलिया लौटते समय मारकुंडी घाटी में विश्राम के दौरान मंजरी ने प्रेम की अमर निशानी मांगी। उसने लोरिक से अनुरोध किया कि वे अपनी तलवार से एक विशाल पत्थर को काट दें। लोरिक ने एक ही प्रहार में उस भारी चट्टान को दो टुकड़ों में विभाजित कर दिया। आज यह ‘वीर लोरिक पत्थर’ के नाम से प्रसिद्ध है, जो घाटी की हरियाली भरी पहाड़ियों के बीच खड़ा प्रेम और वीरता का जीवंत प्रतीक बना हुआ है।
स्थानीय लोग बताते हैं कि प्राचीन शिलाएं आज भी इस जोड़े की मूक गवाही दे रही हैं। लोकगीतों में गाई जाने वाली यह कथा पीढ़ी-दर-पीढ़ी जीवित है। वैलेंटाइन डे पर युवा जोड़े यहां पहुंचकर प्रेम की शपथ लेते हैं और इस स्थान को ‘भारतीय रोमियो-जूलियट’ की तरह याद करते हैं। लोकसंस्कृति के जानकारों का कहना है कि सच्चा प्रेम समय, समाज और बंधनों से परे होता है, वीर लोरिक और मंजरी की गाथा इसका सबसे जीता-जागता प्रमाण है।

