सूरत में मकर संक्रांति के उत्सव के बीच ‘काल’ बनी पतंग की डोर

सूरत में मकर संक्रांति के उत्सव के बीच ‘काल’ बनी पतंग की डोर

एक ही दिन में ली कई निर्दोष लोगों की जान

सूरत (जनवार्ता)। गुजरात के सूरत शहर में उत्तरायण यानी मकर संक्रांति के मौके पर पतंगबाजी का जश्न इस बार मौत की सौगात लेकर आया। चाइनीज मांझा यानी कांच या सिंथेटिक से लेपित धारदार डोर ने एक ही दिन में कई निर्दोष लोगों की जान ले ली। इनमें सबसे दिल दहला देने वाली घटना एक ही परिवार के तीन सदस्यों की दर्दनाक मौत की रही।

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सबसे पहले जहांगीरपुरा इलाके की आनंद विला सोसाइटी में एक आठ साल के मासूम बच्चे रियंश बोर्से की जान चली गई। बच्चा अपनी सोसाइटी में साइकिल चला रहा था तभी ऊपर से लटकती एक धारदार मांझा उसके गले में फंस गई। डोर इतनी तेज थी कि बच्चे का गला गहराई तक कट गया और वह रास्ते में ही खून बहकर दम तोड़ दिया। इस पूरी घटना का सीसीटीवी फुटेज सामने आया है जिसमें हादसे की भयावहता साफ दिखाई देती है। परिजन उसे तुरंत अस्पताल ले जाने की कोशिश में जुटे लेकिन बच्चा रास्ते में ही चल बसा।

इसके कुछ ही देर बाद चंद्रशेखर आजाद फ्लाईओवर जिसे जिलानी ब्रिज के नाम से भी जाना जाता है वहां दूसरी भयानक घटना घटी। कोलकाता के मूल निवासी रेहान शेख अपनी पत्नी रेहाना और सात से दस साल की छोटी बेटी आयशा के साथ बाइक पर ब्रिज से गुजर रहे थे। अचानक मांझा रेहान के गले में फंस गया। संतुलन बिगड़ने से बाइक अनियंत्रित हो गई और तेज रफ्तार में ब्रिज की रेलिंग से टकराकर लगभग सत्तर फीट नीचे गिर गई। इस हादसे में पिता और बेटी की मौके पर ही मौत हो गई जबकि गंभीर रूप से घायल मां को अस्पताल पहुंचाया गया लेकिन इलाज के दौरान वह भी नहीं बच पाईं। इस घटना का भी सीसीटीवी फुटेज वायरल हो रहा है जिसमें परिवार के साथ हुई तबाही साफ नजर आती है। तीनों शवों को बाद में विमान से कोलकाता उनके पैतृक घर भेज दिया गया।

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विभिन्न समाचार रिपोर्टों के मुताबिक उत्तरायण के दौरान गुजरात में मांझे से जुड़े हादसों में कम से कम छह से नौ लोगों की जान जा चुकी है जिसमें कई बच्चे भी शामिल हैं। सूरत में ही दर्जनों लोग घायल होकर अस्पतालों में भर्ती हैं। राज्य सरकार और हाईकोर्ट द्वारा चाइनीज मांझा पर पूर्ण प्रतिबंध के बावजूद इसका अवैध व्यापार और इस्तेमाल खुलेआम जारी है। पुलिस ने अब बिक्री करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है लेकिन जिन परिवारों ने अपने अपनों को खो दिया है उनके लिए यह त्योहार हमेशा के लिए एक काला और दर्दनाक अध्याय बन गया है।

Shiv murti

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