मणिकर्णिका घाट पर एआई-जनरेटेड फर्जी तस्वीरें फैलाने पर 8 एफआईआर दर्ज
वाराणसी (जनवार्ता)। काशी के सबसे पवित्र स्थलों में शामिल मणिकर्णिका घाट के सौंदर्यीकरण और पुनर्विकास कार्य को लेकर सोशल मीडिया पर फैलाई गई भ्रामक सूचनाओं और AI से बनी फर्जी तस्वीरों के खिलाफ वाराणसी पुलिस ने तेज कार्रवाई की है। चौक थाने में कुल आठ अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए गए हैं, जिनमें कई व्यक्तियों और X हैंडल्स को नामजद किया गया है।

यह विवाद तब शुरू हुआ जब कुछ यूजर्स ने विकास कार्य के दौरान मंदिरों और मूर्तियों के तोड़े जाने की फर्जी AI-जनरेटेड तस्वीरें शेयर कीं। इन पोस्टों में भारत सरकार की तुलना मुगल बादशाह औरंगजेब से की गई, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत होने और सामाजिक तनाव बढ़ने का खतरा पैदा हो गया।
शिकायतकर्ता मानो, जो तमिलनाडु के निवासी हैं, उनकी कंपनी 15 नवंबर 2025 से घाट पर श्मशान सुविधाओं को मजबूत करने और सौंदर्यीकरण का कार्य कर रही है। उन्होंने 16 जनवरी की रात वायरल हुई फर्जी पोस्ट्स का जिक्र करते हुए पुलिस को तहरीर दी। पुलिस का कहना है कि इन पोस्टों का उद्देश्य हिंदू श्रद्धालुओं को भ्रमित करना, उनमें आक्रोश पैदा करना और सामाजिक सद्भाव बिगाड़ना था।
इस मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 196 के तहत विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता बढ़ावा देने, धारा 298 के तहत धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के इरादे से शब्द कहने, धारा 299 के तहत धार्मिक विश्वासों का अपमान कर भावनाओं को ठेस पहुंचाने और धारा 353 के तहत लोक शांति भंग करने के इरादे से भ्रामक सूचना फैलाने के आरोप लगाए गए हैं।
प्रशासन ने स्पष्ट अपील की है कि विकास कार्यों से जुड़ी कोई भी भ्रामक या AI-जनरेटेड सामग्री शेयर करना गंभीर अपराध है। पुलिस ने सभी सोशल मीडिया यूजर्स से अनुरोध किया है कि किसी भी पोस्ट को शेयर करने से पहले उसकी सत्यता की जांच जरूर करें।

