मथुरा : गौरक्षक ‘फरसा वाले बाबा’ की दुखद मृत्यु पर अविमुक्तेश्वरानंद ने यूपी सरकार से की सख्त कार्रवाई की मांग
वाराणसी/मथुरा: उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में गौरक्षक ‘फरसा वाले बाबा’ के नाम से प्रसिद्ध संत चंद्रशेखर की ट्रक से कुचलकर हुई मौत ने पूरे ब्रज क्षेत्र में आक्रोश की लहर पैदा कर दी है। इस घटना पर ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कड़े शब्दों में प्रतिक्रिया देते हुए उत्तर प्रदेश सरकार से तत्काल और कठोर कार्रवाई की मांग की है।

शंकराचार्य ने कहा, “प्रदेश सरकार दावा करती थी कि यहां गाय को कोई खरोंच तक नहीं पहुंचा सकता, लेकिन अब गौरक्षकों पर ही जानलेवा हमले हो रहे हैं। यह घटना गौरक्षकों के मनोबल पर बड़ा प्रहार है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।” उन्होंने दोषियों के खिलाफ ‘दूध का दूध और पानी का पानी’ करते हुए तुरंत सलाखों के पीछे भेजने और एनकाउंटर की मांग की है ताकि भविष्य में कोई गौरक्षक की ओर आंख उठाने का साहस न कर सके।
घटना की जानकारी के अनुसार, शनिवार तड़के करीब चार बजे कोसीकलां थाना क्षेत्र के नवीपुर गांव के पास ईद के अवसर पर संभावित गोकशी को रोकने के प्रयास में ‘फरसा वाले बाबा’ ने एक संदिग्ध ट्रक को रोका था। गौरक्षकों के आरोप हैं कि तस्करों ने जानबूझकर ट्रक चढ़ाकर उनकी हत्या कर दी। हालांकि पुलिस का कहना है कि घने कोहरे के कारण एक अन्य ट्रक ने पीछे से टक्कर मारी, जिससे यह दुर्घटना हुई। ट्रक चालक की भी मौत हो गई। पुलिस ने इसे सड़क हादसा बताया है और जांच जारी है।
घटना के बाद आक्रोशित भीड़ ने दिल्ली-आगरा हाईवे जाम कर दिया, पुलिस वाहनों पर पथराव किया और तोड़फोड़ की, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हुए। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा और कई लोगों को हिरासत में लिया गया।
शंकराचार्य ने आगे कहा, “एक सच्चा गौ-भक्त, जो निरंतर गायों की सेवा और रक्षा में लगा था, उसकी इस तरह हत्या करना पूरे समाज के लिए चिंता का विषय है। यदि गौ-सेवा करने वाले संत और भक्त ही सुरक्षित नहीं रहेंगे, तो समाज में धर्म की रक्षा कैसे होगी?” उन्होंने मथुरा पुलिस को निर्देशित किया कि दोषियों पर कठोर धाराएं लगाकर ऐसी कार्रवाई हो जो मिसाल बने।
‘फरसा वाले बाबा’ का असली नाम चंद्रशेखर था और वे फरसा (कुल्हाड़ी जैसा हथियार) लेकर गौ-तस्करी रोकने के लिए प्रसिद्ध थे। ब्रज क्षेत्र में उनकी गौशाला चलाने और गौरक्षकों की टीम बनाने के कारण बड़ी संख्या में अनुयायी थे। उनकी मौत के बाद संत समाज और गौभक्तों में गहरा शोक और रोष व्याप्त है।
प्रशासन ने मामले की जांच तेज कर दी है और शांति बनाए रखने की अपील की है।

