खोजी पत्रकारिता पर संकट: बीएचयू संगोष्ठी में विशेषज्ञों की चेतावनी
वाराणसी (जनवार्ता)। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग द्वारा आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी “सोशल मीडिया के युग में पत्रकारिता और जनसंचार में बदलते रुझान” के दूसरे दिन विशेषज्ञों ने सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की।

उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया ने जनसंचार को लोकतांत्रिक बनाने के साथ-साथ पत्रकारिता को अब व्यक्ति-केंद्रित बना दिया है, जबकि गहन खोजी पत्रकारिता तेजी से कमजोर हो रही है।
मुख्य वक्ता प्रो. के.जी. सुरेश (निदेशक, इंडिया हैबिटेट सेंटर, नई दिल्ली) ने कहा,
“सोशल मीडिया ने मुख्यधारा मीडिया से छूटे कई महत्वपूर्ण मुद्दों को सामने लाया, लेकिन अब व्यक्तियों को खबरों के विषयों से ज्यादा महत्व मिल रहा है। यह रुझान लोकतंत्र के लिए खतरनाक है।”
उन्होंने रील्स और शॉर्ट वीडियो संस्कृति पर विशेष चिंता जताते हुए कहा कि
“एक मिनट में सब कुछ जान लेने की लालसा ने कंटेंट की गहराई और गुणवत्ता से समझौता करा दिया है। युवा पीढ़ी गंभीर मुद्दों से कटकर छोटे-छोटे वीडियो में उलझ गई है, जिससे समाज में तुच्छीकरण (ट्रिवियलाइजेशन) तेजी से फैल रहा है।”
प्रो. सुरेश ने आगे कहा कि व्यूज और मोनेटाइजेशन के दबाव में डिजिटल प्लेटफॉर्म हाशिए पर पड़े लोगों की आवाज को जगह देने में बुरी तरह असफल हो रहे हैं।
वरिष्ठ शिक्षाविद एवं पूर्व कुलपति प्रो. के.वी. नागराज ने सोशल मीडिया को मोबोक्रेसी (मोबाइल द्वारा शासित व्यवस्था) का नाम देते हुए टिप्पणी की कि
“यूट्यूब और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर आज जिम्मेदारी और जवाबदेही का अभाव साफ नजर आता है। बिना विचारधारा के संचार अर्थहीन है। सोशल मीडिया हमें एक ऐसा कोकून दे रहा है जिसमें सामाजिक हस्तक्षेप और संवाद लगातार कम हो रहा है।”
उन्होंने महात्मा गांधी के संदर्भ में कहा कि
“सामाजिक उत्तरदायित्व और जवाबदेही के बिना पत्रकारिता अपने मूल उद्देश्य से भटक जाती है।”
संगोष्ठी में कुल 180 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। अमेरिका, रूस, नेपाल, बांग्लादेश और मलेशिया सहित कई देशों के विशेषज्ञों ने मीडिया साक्षरता, एल्गोरिद्म द्वारा ध्रुवीकरण, नैतिक पत्रकारिता और सामाजिक उत्तरदायित्व जैसे गंभीर मुद्दों पर विचार रखे।
सभी विशेषज्ञों ने इस बात पर एकमत होकर कहा कि आज भी प्रिंट मीडिया समाज को सही दिशा देने और गंभीर मुद्दों पर विचार निर्माण में सबसे प्रभावी माध्यम बना हुआ है।
सत्र की अध्यक्षता संजीव भानावत (संपादक, कम्युनिकेशन टुडे) ने की। संगोष्ठी के आयोजक सचिव डॉ. बाला लखेंद्र ने संचालन किया, जबकि विभागाध्यक्ष डॉ. ज्ञानप्रकाश मिश्र ने अतिथियों का स्वागत किया।
वक्ताओं ने समवेत रूप से पत्रकारिता के मूल्यों को पुनः स्थापित करने और जिम्मेदार संचार की आवश्यकता पर बल दिया।

