डिप्टी सीएम ने वाराणसी में की घोषणा
एक करोड़ महिलाएं होंगी लखपति महिला क्लब की सदस्य
वाराणसी (जनवार्ता) : उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में आयोजित 11 दिवसीय रीजनल (राष्ट्रीय स्तर) सरस मेले के समापन समारोह में महिलाओं के लिए बड़ी घोषणा की। उन्होंने कहा कि प्रदेश की एक करोड़ महिलाओं को लखपति महिला क्लब में शामिल किया जाएगा और उन्हें करोड़पति महिला बनाने का लक्ष्य हासिल किया जाएगा।

उप मुख्यमंत्री ने इस दौरान महिलाओं से अपील की कि अधिक से अधिक महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ा जाए। उन्होंने कहा, “सरस मेलों के माध्यम से अन्य प्रदेशों और जनपदों की महिलाएं प्रेरित होंगी और आगे आकर कार्य करेंगी।” उन्होंने मेले में लगे स्टालों का अवलोकन किया, उत्पादों की जानकारी ली और आजीविका मिशन के फूड कोर्ट की सराहना की।
मेले में विभिन्न राज्यों और उत्तर प्रदेश के जनपदों से आई महिला समूहों ने लगभग एक करोड़ रुपये का व्यापार किया। प्रमुख उत्पादों में सजावटी सामग्री, खाद्य प्रसाद, पीतल की वस्तुएं, अचार-मुरब्बा, लेदर उत्पाद, आर्टिफिशियल ज्वेलरी, कुर्ती, चादर, कालीन, जूट और मूंज के उत्पाद शामिल थे।
समारोह में उप मुख्यमंत्री ने वाराणसी की दो बीमा सखियों मीना देवी एवं प्रतिभा देवी तथा दो लखपति महिलाओं शर्मीला देवी एवं लक्ष्मी वर्मा को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया। साथ ही जनपद के 703 समूहों को सामुदायिक निवेश निधि और 20 समूहों को रिवॉल्विंग फंड के तहत कुल 10 करोड़ 60 लाख 50 हजार रुपये के प्रतीकात्मक चेक वितरित किए। दो समूहों की महिलाओं को ई-रिक्शा भी प्रदान किए गए।
उन्होंने आने वाले दिनों में और अधिक सरस मेलों के आयोजन की घोषणा की, ताकि महिलाओं के उत्पादों को व्यापक बाजार मिल सके। यह घोषणा केंद्र सरकार की लखपति दीदी योजना से जुड़ी है, जिसे आम बजट में और विस्तार दिया गया है। योजना के तहत महिलाओं को प्रशिक्षण के साथ-साथ रिटेल आउटलेट बढ़ाकर उत्पाद बेचने के बेहतर अवसर प्रदान किए जा रहे हैं।
उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (UPSRLM) के तहत यह लक्ष्य महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। पहले चरण में 19 लाख से अधिक महिलाएं पहले ही लखपति दीदी बन चुकी हैं, और अब एक करोड़ का नया लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
यह पहल ग्रामीण महिलाओं के लिए न केवल आर्थिक स्वावलंबन, बल्कि सामाजिक उत्थान का भी माध्यम बनेगी।

