पौष पूर्णिमा पर श्रद्धालुओं ने गंगा में लगाई आस्था की डुबकी

पौष पूर्णिमा पर श्रद्धालुओं ने गंगा में लगाई आस्था की डुबकी

वाराणसी (जनवार्ता) : घने कोहरे और कड़ाके की ठंड के बावजूद पौष पूर्णिमा पर शनिवार को काशी की पवित्र गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। भोर से ही हजारों भक्तों ने गंगा में आस्था की डुबकी लगाई और दान-पुण्य किया। घाटों पर “हर-हर गंगे” तथा “काशी विश्वनाथ शंभो” के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।

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स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने श्री काशी विश्वनाथ मंदिर, माता अन्नपूर्णा मंदिर सहित अन्य प्रमुख देवालयों में पूजा-अर्चना की। ठंड के कारण गंगा का जल बेहद ठंडा था, लेकिन भक्तों का उत्साह कम नहीं हुआ। विशेषज्ञों के अनुसार, इसकी एक बड़ी वजह प्रयागराज में माघ मेले की शुरुआत भी है, जो पौष पूर्णिमा से ही मानी जाती है। इससे धार्मिक आस्था और प्रबल हो गई।

स्नान पर्व को देखते हुए प्रशासन ने घाटों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे। पुलिस, पीएसी और एनडीआरएफ की टीमें तैनात रहीं, जबकि नावों से गंगा में लगातार गश्त की गई। दशाश्वमेध घाट, शीतला घाट, अहिल्याबाई घाट, पंचगंगा घाट, तुलसी घाट, अस्सी घाट समेत सभी प्रमुख घाटों पर सुबह से ही चहल-पहल रही। दिन चढ़ते तक श्रद्धालु स्नान के लिए पहुंचते रहे।

गौरतलब है कि हिंदू पंचांग के अनुसार पौष पूर्णिमा इस वर्ष 3 जनवरी को मनाई गई। इस दिन पौष मास का समापन और माघ मास का आरंभ होता है। कर्मकांडी विद्वानों के अनुसार, इस तिथि पर गंगा स्नान, दान और धार्मिक अनुष्ठान से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है तथा पापों का नाश होता है। माघ मास के स्नान का विशेष महत्व है, विशेषकर प्रयागराज संगम पर कल्पवास करने वालों के लिए।

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यह पर्व न केवल आध्यात्मिक शुद्धि का प्रतीक है, बल्कि सनातन संस्कृति की जीवंत परंपरा को भी दर्शाता है।

Shiv murti

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