सर्किट हाउस में केंद्रीय मंत्री का किसानों ने किया घेराव

सर्किट हाउस में केंद्रीय मंत्री का किसानों ने किया घेराव

पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को लिया हिरासत में

वाराणसी (जनवार्ता) । केंद्रीय बजट 2026-27 पर चर्चा के लिए शनिवार को वाराणसी पहुंचे केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री कमलेश पासवान को सर्किट हाउस में स्थानीय किसानों के तीव्र विरोध का सामना करना पड़ा। पिंडरा तहसील के किसानों ने अचानक प्रेस वार्ता के दौरान पहुंचकर जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी और ‘काशी द्वार आवासीय योजना’ के तहत प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण के खिलाफ अपनी नाराजगी जताई। प्रदर्शनकारियों ने मंत्री को घेर लिया, जिससे पूरा माहौल तनावपूर्ण हो गया। स्थिति बिगड़ती देख मंत्री पासवान ने प्रेस वार्ता बीच में छोड़ दी और अपने कमरे की ओर चले गए। स्थानीय नेताओं ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने विरोध कर रहे किसानों को हिरासत में ले लिया। बाद में वरिष्ठ अधिकारी भी घटनास्थल पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। हंगामे के बाद मंत्री अपने अगले कार्यक्रम के लिए रवाना हो गए, जबकि किसान पुलिस निगरानी में रहे।

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यह विरोध मुख्य रूप से पिंडरा क्षेत्र में प्रस्तावित ‘काशी द्वार आवासीय योजना’ से जुड़ा है। सरकार इस योजना के तहत करीब 10 गांवों जैसे मानापुर, चनौली, चकइन्दर, जददुपुर, बसनी, बेलवा आदि की 800 एकड़ से अधिक उपजाऊ जमीन अधिग्रहित कर हाईटेक कॉलोनी विकसित करने की तैयारी में है। उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद ने सात गांवों में सर्वे पूरा कर लिया है, जबकि तीन गांवों में किसानों के विरोध के कारण प्रक्रिया रुकी हुई है। किसान परिवारों का साफ कहना है कि वे अपनी जमीन किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ेंगे और जरूरत पड़ने पर जेल जाने को भी तैयार हैं। वे मुआवजे की राशि को अपर्याप्त बता रहे हैं और अपनी आजीविका पर संकट महसूस कर रहे हैं।

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पिंडरा एसडीएम प्रतिभा मिश्रा ने बताया कि सर्वे टीम के लौटने की उन्हें कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है। दूसरी ओर, केंद्रीय मंत्री कमलेश पासवान ने पत्रकारों से बातचीत में बजट को “विकसित भारत के सपनों को साकार करने वाला” बताया और कहा कि यह किसानों, युवाओं तथा महिलाओं के हित में कई महत्वपूर्ण प्रावधानों से युक्त है।

यह घटना पिंडरा क्षेत्र में लंबे समय से चले आ रहे भूमि अधिग्रहण विवाद को एक बार फिर उजागर करती है, जहां किसान अपनी उपजाऊ जमीन और आजीविका बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। स्थिति पर सभी की नजर बनी हुई है और आगे क्या घटित होता है, यह देखना बाकी है।

Shiv murti

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