कोडीन कफ सिरप : 25-25 हजार के इनामी पिता-पुत्र गिरफ्तार
13.53 करोड़ की संपत्ति पहले ही फ्रीज
वाराणसी (जनवार्ता) । कोडीन आधारित नशीले कफ सिरप की अंतरराष्ट्रीय स्तर की तस्करी करने वाले सिंडिकेट के खिलाफ वाराणसी पुलिस ने एक और बड़ी सफलता हासिल की है। कोतवाली पुलिस और एसआईटी की संयुक्त टीम ने मुख्य सरगना शुभम जायसवाल के सबसे करीबी सहयोगी मनोज यादव (औसानगंज, जैतपुरा निवासी) और उसके बेटे लक्ष्य यादव को गिरफ्तार कर लिया है। दोनों पर 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित था।

गिरफ्तारी गुरुवार रात रामनगर क्षेत्र के टेंगरा मोड़ के पास से की गई, जब दोनों कोलकाता से छिपकर वाराणसी लौट रहे थे। पुलिस को सटीक सूचना मिलने पर कोतवाली प्रभारी निरीक्षक दयाशंकर सिंह की टीम ने उन्हें दबोच लिया। शुक्रवार को दोनों को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया।
जांच में सामने आया कि मनोज यादव पिछले 25 साल से दवा कारोबार से जुड़े थे और सिंडिकेट में मनी लॉन्ड्रिंग के मुख्य सूत्रधार थे। उन्होंने शुभम जायसवाल की फर्म शैली ट्रेडर्स के जरिए कागजी तौर पर करीब 2 करोड़ रुपये की कोडीन युक्त कफ सिरप (जैसे फेंसेडिल) की खरीद-बिक्री दिखाई, जबकि माल कभी वाराणसी नहीं पहुंचा। असल तस्करी अवैध रास्तों से होती थी और मनोज की बोगस फर्मों एलएमएस इंफ्रा प्रा. लि. तथा सिंडिकेट एंटरप्राइजेज के माध्यम से काली कमाई को सफेद किया जाता था। फर्जी ई-बिल और हवाला का जाल फैलाकर करोड़ों की कमाई की गई, जिससे संपत्तियां बनाई गईं।
पुलिस ने पहले ही सफेमा ट्रिब्यूनल के आदेश पर मनोज यादव की 13.53 करोड़ रुपये (कुछ रिपोर्टों में 12.53 करोड़ से 14 करोड़ तक) की अचल और चल संपत्तियां फ्रीज/जब्त की थीं। इसमें 20 से अधिक प्रॉपर्टी, बैंक खातों में 86 लाख से ज्यादा राशि और शुभम जायसवाल के पिता भोला प्रसाद के साथ संयुक्त दो प्लॉट (1 करोड़ से अधिक मूल्य के) शामिल हैं। मनोज पर पहले से कई आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं।
यह सिंडिकेट पूर्वी उत्तर प्रदेश और पड़ोसी राज्यों में कोडीन युक्त सिरप की बड़े पैमाने पर तस्करी करता था। शुभम जायसवाल अभी फरार हैं और उन पर जल्द भगोड़ा घोषित करने की तैयारी चल रही है। पुलिस का कहना है कि जांच जारी है और पूरे नेटवर्क को बेनकाब करने के लिए एसआईटी सक्रिय है।

