जीवनदीप में अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस का हुआ आयोजन
छात्रों ने भोजपुरी गायन, नृत्य और नाटक की प्रस्तुति से बांधा समा
वाराणसी (जनवार्ता)। बड़ा लालपुर स्थित जीवनदीप शिक्षण समूह के नर्सिंग हॉल में महाविद्यालय के शिक्षा विभाग की ओर से शनिवार को अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस का आयोजन हुआ।

कार्यक्रम का शुभारंभ गणेश प्रतिमा पर माल्यार्पण व दीप प्रज्जवलन से हुआ। जीवनदीप शिक्षण समूह के चेयरमैन डा. अशोक कुमार सिंह और वाइस चेयरमैन ने अतिथियों को पुष्पगुच्छ, अंग वस्त्र व स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। चेयरमैन डा. सिंह ने कहा कि सुंदर सरल तथा मधुर भाषा की बात की जाए तो भोजपुरी भाषा सबसे समृद्ध व सर्वोपरि है और भाषाओं में भोजपुरी हमारी माँ और अन्य भाषाएं मौसी है, जो हमारी पहचान और संस्कृति का आधार भी है कार्यक्रम की मुख्य अतिथि काशी विद्यापीठ कि कुलसचिव डॉ. सुनीता पांडेय ने कहा कि भाषा का अपना महत्व होता है भोजपुरी भाषा किसी भी मामले में अन्य से कम नही है विशिष्ट अतिथि प्रो. गुरुशरण सिंह कहा कि भोजपुरी का अपना साहित्य होता है और भोजपुरी को आठवीं अनुसूची में शामिल किया जाए। सोनभद्र से आए जगदीश पंथी ने भोजपुरी में एक गीत गाकर “ऐ मोरे बाबू ऐ मोरे भैया” समा बांध दिया, बीएचयू से आए प्रो. प्रभाकर सिंह ने कहा मातृभाषा वह पहली भाषा होती है जिसे हम बचपन में सीखते हैं। किसी भी व्यक्ति या देशवासी के लिए उसकी मातृभाषा अहम है। काशी विद्यापीठ के प्रो. राजमुनि ने कहा मातृभाषा सोचने व समझने की क्षमता के साथ आत्मविश्वास बढ़ाती है प्रो. गोरखनाथ पांडे ने कहा भोजपुरी भाषा अपनी सांस्कृतिक से जुड़ाव बनाए रखती है। इस दौरान भोजपुरी लोकगीतों पर रंगारंग कार्यक्रमों की प्रस्तुति और नाट्य मंचन भी हुआ। गणपति वंदना शिवानी कुसुम, स्वागत गीत शांभवी ने गाया। संचालन बीएड के छात्र सौरभ और सिमरन व धन्यवाद ज्ञापन बीटीसी की प्राचार्य डॉ.नंदा द्विवेदी ने दिया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. इन्द्रेश चंद्र सिंह,उप प्राचार्य डॉ. अमित कुमार सिंह, शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष जिनेन्द्र सिंह, अल्का सिंह सहित शिक्षक, कर्मचारी व छात्र मौजूद रहे।

