बनारस में क्वीयर खेल प्रतियोगिता में अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी नीलू मिश्रा ने की शिरकत
वाराणसी । बनारस क्वीयर प्राइड के तत्वावधान में शनिवार को कांशीराम आवास में क्वीयर खेल प्रतियोगिता का आयोजन उत्साहपूर्ण वातावरण में किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य खेलों के माध्यम से समावेशी माहौल तैयार करना, बंधुत्व की भावना को बढ़ावा देना और सभी प्रतिभागियों को साझा मंच प्रदान करना रहा।


अंतर्राष्ट्रीय स्तर की प्रसिद्ध खिलाड़ी नीलू मिश्रा ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की और विजेताओं को मेडल पहनाकर सम्मानित किया। उन्होंने कहा, “समाज अभी पूरी तरह जागरूक नहीं हुआ है। हम शिक्षित होने का दावा करते हैं, लेकिन क्वीयर समुदाय अभी भी कंधे से कंधा मिलाकर आगे नहीं आ पाया है। आज इतने उत्साह से खेलते देखकर बहुत खुशी हो रही है। एक अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी के रूप में कहूंगी कि अगर फिट हैं तो हिट हैं।”
कार्यक्रम की शुरुआत बनारस क्वीयर प्राइड की संस्थापक आरोही के उद्घाटन वक्तव्य से हुई। लोक गायिका ज्योति, उम्मीद फाउंडेशन के सामाजिक कार्यकर्ता महेंद्र और एशियन ब्रिज इंडिया के साहिल ने प्रतियोगिता का औपचारिक शुभारंभ किया। कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय की प्रधानाचार्या विशाखा सिंह ने खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा, “आज के व्यस्त दौर में कई खेल विलुप्त हो चुके हैं। खेल ऐसा माध्यम है जो सम्मान, समानता और भाईचारे को बढ़ावा देता है। खेलते समय हम धर्म, जाति, अमीरी-गरीबी, जेंडर या सेक्सुअलिटी नहीं देखते—खेल हमें जोड़ता है।”
कार्यक्रम का संचालन अनन्या मिथि और राधा ने किया। दिनभर में कुल 10 खेल प्रतियोगिताएं आयोजित हुईं, जिनमें क्वीयर समुदाय, कांशीराम आवास के दलित युवा-युवतियां और बनारस के विभिन्न हिस्सों से आए प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
प्रतियोगिताओं के बाद संवाद सत्र हुआ, जिसमें नीलू मिश्रा के अलावा विशाखा सिंह, योग शिक्षिका अंजु, भारती शिक्षा निकेतन के धनंजय, सद्भावना संगम की जागृति, नेशनल अलाइंस फॉर सोशल जस्टिस के अनूप श्रमिक, एशियन ब्रिज इंडिया के साहिल, नत समुदाय के प्रेम नट, UNICEF के गुरदीप, दामिनी की राधा तथा प्रगति फाउंडेशन के दीपक पुजारी और निलम उपस्थित रहे। सभी ने खेल भावना, निरंतर अभ्यास, अनुशासन और समावेशी समाज पर प्रेरक विचार साझा किए।
कार्यक्रम में प्रिज्मैटिक फाउंडेशन, एशियन ब्रिज इंडिया, सोहार्द पीस सेंटर, उम्मीद फाउंडेशन, दामिनी, सद्भावना संगम और उमाकांत जैसी संस्थाओं की महत्वपूर्ण भागीदारी रही। सफल आयोजन में नीति, रुमान, चंदन, अफसाना, आर्या, हेतवी, श्रेया, अनामिका, कैलाश, आसिम और नैंसी की सक्रिय भूमिका उल्लेखनीय रही।

