अंतरराज्यीय साइबर ठग गिरोह का पर्दाफाश, सरगना सहित 9 गिरफ्तार
वाराणसी (जनवार्ता) । वाराणसी पुलिस की साइबर क्राइम टीम ने फर्जी कॉल सेंटर चलाकर शेयर ट्रेडिंग के नाम पर लोगों से ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने गिरोह के सरगना सहित नौ शातिर अपराधियों को गिरफ्तार किया।

आरोपियों के पास से कई मोबाइल फोन, एटीएम कार्ड, सिम कार्ड, बैंक दस्तावेज, लैपटॉप, सोने की ज्वेलरी और 4 लाख 88 हजार 920 रुपये नकद बरामद हुए हैं। गिरफ्तार आरोपियों को बुधवार को पुलिस लाइन सभागार में मीडिया के समक्ष पेश किया गया। इस मौके पर अपर पुलिस उपायुक्त (साइबर क्राइम) नीतू कादयान और सहायक पुलिस आयुक्त (साइबर क्राइम) विदुष सक्सेना ने मामले की विस्तार से जानकारी दी।
अधिकारियों ने बताया कि उत्तर प्रदेश पुलिस महानिदेशक के निर्देश पर साइबर अपराधों के खिलाफ विशेष अभियान चल रहा है। इसी कड़ी में सूचना मिली कि कुछ अपराधी अवैध कॉल सेंटर के जरिए शेयर ट्रेडिंग में अधिक मुनाफे का लालच देकर लोगों को ठग रहे हैं। सूचना पर डीसीपी क्राइम सरवणन टी., एडीसीपी साइबर क्राइम और एसीपी साइबर क्राइम के नेतृत्व में टीम गठित की गई। प्रभारी निरीक्षक साइबर क्राइम गोपाल जी कुशवाहा की अगुवाई में मंगलवार शाम लंका थाना क्षेत्र के गांधीनगर कॉलोनी में छापेमारी की गई, जहां से नौ आरोपियों को पकड़ा गया।
गिरफ्तार आरोपी हैं – सरगना सोमिल मोदनवाल (उर्दू बाजार, जौनपुर), अमित सिंह, अभय मौर्य, कृष्णा विश्वकर्मा, अभिषेक तिवारी, शिवा वैश्य, अमन मौर्य, विजय कुमार उर्फ विक्की और सुजल चौरसिया। सभी जौनपुर जिले के निवासी हैं।
पूछताछ में सरगना सोमिल मोदनवाल ने कबूल किया कि गिरोह नामी कंपनियों के नाम का दुरुपयोग कर मेटा और गूगल जैसे प्लेटफॉर्म पर विज्ञापन देता था। विज्ञापनों से प्राप्त डेटा के आधार पर लोगों को कॉल कर आकर्षक ऑफर दिए जाते थे। आरोपी खुद को ट्रेडिंग एक्सपर्ट बताकर पीड़ितों के डिमैट अकाउंट की लॉगिन आईडी और पासवर्ड हासिल कर लेते थे। इसके बाद बार-बार ट्रांजेक्शन कराकर नुकसान पहुंचाते और खाते की रकम फर्जी म्यूल अकाउंट्स में ट्रांसफर कर निकाल लेते थे।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि गिरोह के अन्य सदस्यों और नेटवर्क की तलाश जारी है तथा आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। इस सफलता पर डीसीपी क्राइम ने टीम को 25 हजार रुपये का पुरस्कार देने की घोषणा की है।

