त्रिपुरा के पत्रकारों ने वाराणसी में आईआईवीआर का दौरा कर समझी सब्जी उत्पादन की नई संभावनाएं
वाराणसी (जनवार्ता) : प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) अगरतला की पहल पर त्रिपुरा के पत्रकारों का एक दल भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (आईआईवीआर), वाराणसी पहुंचा। इस भ्रमण का मुख्य उद्देश्य उत्तर-पूर्वी राज्यों, खासकर त्रिपुरा में सब्जी उत्पादन की बढ़ती संभावनाओं और संस्थान के शोध एवं विकास योगदान को करीब से समझना था।


संस्थान के निदेशक डॉ. राजेश कुमार ने पत्रकारों का स्वागत करते हुए कहा कि उत्तर-पूर्वी पर्वतीय क्षेत्र की अनुकूल जलवायु और विविध कृषि परिस्थितियां विभिन्न सब्जियों की खेती के लिए आदर्श हैं। यह क्षेत्र पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने, किसानों की आय बढ़ाने और रोजगार सृजन के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने जोर दिया कि उन्नत किस्मों, जलवायु-सहिष्णु तकनीकों और बेहतर उत्पादन प्रबंधन को अपनाकर सब्जी उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है।

डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि आईआईवीआर उत्तर-पूर्व के लिए उपयुक्त सब्जी किस्मों का विकास, उत्पादन तकनीकों का प्रसार और किसानों-हितधारकों की क्षमता निर्माण में निरंतर सक्रिय है। संस्थान त्रिपुरा सहित पूरे क्षेत्र में वैज्ञानिक सहयोग प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।
एनईएच (उत्तर-पूर्वी पर्वतीय) क्षेत्र में चल रही अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों पर डॉ. राकेश कुमार दुबे ने विस्तृत प्रस्तुति दी, जिसमें किसानों के लिए उपयोगी तकनीकें और कार्यक्रमों की जानकारी शामिल थी।
पत्रकारों ने वैज्ञानिकों से उत्सुकता पूर्वक संवाद किया और त्रिपुरा में सब्जी उत्पादन की वर्तमान स्थिति, किसानों की चुनौतियों तथा आईआईवीआर की भूमिका पर गहन प्रश्न पूछे।
भ्रमण के दौरान दल ने संस्थान के अनुसंधान फार्म, हाई-टेक नर्सरी और ब्रिमेटो/पोमेटो की प्रायोगिक फसलों का अवलोकन किया। ब्रिमेटो (बैंगन और टमाटर एक ही पौधे पर) तथा पोमेटो (आलू और टमाटर एक ही पौधे पर) जैसी ग्राफ्टिंग तकनीकों ने पत्रकारों का विशेष ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने इन नवाचारों के व्यावहारिक उपयोग, सीमित जगह में अधिक उत्पादन और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से जानकारी ली।
इस अवसर पर संस्थान के विभागाध्यक्ष डॉ. ए.एन. सिंह, डॉ. अनंत बहादुर, पीएमई अध्यक्ष डॉ. एस.के. सिंह सहित अन्य वैज्ञानिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का आयोजन संस्थान के मीडिया सेल द्वारा डॉ. डी.पी. सिंह के नेतृत्व में किया गया, जबकि डॉ. राकेश दुबे और डॉ. इंदिवर प्रसाद ने सफल संचालन में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
यह दौरा आईआईवीआर के शोध कार्यक्रमों से उत्तर-पूर्वी राज्यों को मिल रहे लाभ को रेखांकित करता है तथा क्षेत्र में सब्जी उत्पादन को नई दिशा देने में सहायक सिद्ध होगा।

