एलपीजी सिलेंडर संकट: अन्नक्षेत्र और रेस्टोरेंटों की रसोई ठप
भक्तों-पर्यटकों में मायूसी
वाराणसी (जनवार्ता)। वैश्विक स्तर पर पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण एलपीजी की आपूर्ति प्रभावित होने से वाराणसी में कमर्शियल सिलेंडरों की गंभीर कमी पैदा हो गई है। इससे शहर के प्रसिद्ध अन्नक्षेत्रों और रेस्टोरेंटों की रसोई ठप हो गई है, जिसका सीधा असर लाखों श्रद्धालुओं और पर्यटकों पर पड़ रहा है।

बांसफाटक स्थित मां अन्नपूर्णा मंदिर के अन्नक्षेत्र (अन्नपूर्णा रसोई) को शनिवार को सिलेंडर न मिलने के कारण पूरी तरह बंद रखना पड़ा। यहां रोजाना हजारों भक्तों को मुफ्त भोजन (प्रसाद) मिलता है, लेकिन आज श्रद्धालुओं को खाली हाथ लौटना पड़ा। मंदिर प्रशासन ने प्रभावित भक्तों को कालिका गली वाले अन्य अन्नक्षेत्र में भेजा, जहां सीमित स्तर पर प्रसाद वितरण जारी रहा। यह कई वर्षों बाद ऐसा मौका है जब मां अन्नपूर्णा के अन्नक्षेत्र में चूल्हा नहीं जला।
श्रद्धालुओं ने नाराजगी जताते हुए कहा कि सरकार को सिलेंडर की कमी जल्द दूर करनी चाहिए, क्योंकि अन्नदान जैसा पवित्र कार्य रुकना नहीं चाहिए। एक भक्त ने बताया, “काशी में भूखे नहीं लौटते, लेकिन आज प्रसाद के बिना लौटना पड़ा।”
शहर के कई नामचीन रेस्टोरेंट भी प्रभावित हुए हैं। बनारसी कचौड़ी की दुकानें बंद रहीं, जहां सुबह-सुबह आने वाले ग्राहकों को निराश होकर लौटना पड़ा। कचौड़ी-सब्जी और जलेबी बनाने का काम दो दिनों से रुका हुआ है। मालिक दीपक ने बताया, “सिलेंडर ऊंचे दाम पर मिल रहे हैं, लेकिन उससे मुनाफा नहीं बचता। इसलिए काम बंद करना पड़ा।”
दक्षिण भारतीय व्यंजनों के लिए प्रसिद्ध केरला कैफे (भेलूपुर) भी बंद मिला। यहां डोसा, इडली, सांभर और वड़ा खाने पहुंचे परिवारों को मायूसी हाथ लगी। एक दक्षिण भारतीय परिवार ने कहा, “वाराणसी में यह कैफे बहुत मशहूर है, लेकिन आज बंद मिला। यात्रा अधूरी लग रही है।”
गौदोलिया और अन्य इलाकों में कई बड़े होटल-रेस्टोरेंट भी बंद रहे। ठहरे यात्रियों को बाहर से भोजन की व्यवस्था करनी पड़ी।
यह संकट पूरे देश में फैला हुआ है, जहां रेस्टोरेंट एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि कमर्शियल एलपीजी की आपूर्ति नहीं सुधरी तो बड़े पैमाने पर बंदी हो सकती है। केंद्र सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देते हुए कमर्शियल आपूर्ति सीमित की है। वाराणसी में प्रशासन पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) कनेक्शन बढ़ाने की कवायद तेज कर रहा है, लेकिन फिलहाल स्थिति गंभीर बनी हुई है।
स्थानीय लोग और व्यापारी सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं ताकि काशी की रसोई फिर से जल उठे और अन्नदाता की परंपरा अक्षुण्ण रहे।

