अब शास्त्र के साथ शस्त्र भी!” वाराणसी से ‘शंकराचार्य चतुरंगिणी’ सेना के गठन का ऐलान
गौ, ब्राह्मण और निर्बल सनातनियों की रक्षा के लिए बनी विशेष संरचना, 9 स्तरीय सैन्य ढांचा और 4 अंगों पर आधारित होगा संगठन
वाराणसी (जनवार्ता)। धार्मिक और सामाजिक क्षेत्र में बड़ी हलचल पैदा करने वाली घोषणा में ज्योतिष्पीठ शंकराचार्य सचिवालय, श्रीविद्यामठ, केदारघाट से ‘शंकराचार्य चतुरंगिणी’ (शं.च.) नामक विशेष संगठन के गठन की प्रक्रिया प्रारंभ करने का ऐलान किया गया है।उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि वर्तमान समय में सनातन प्रतीकों विशेषकर गौ-माता, ब्राह्मणों और समाज के कमजोर वर्गों पर बढ़ते अत्याचार को देखते हुए केवल शास्त्र-चर्चा पर्याप्त नहीं है। उन्होंने भगवान परशुराम के संकल्प का उल्लेख करते हुए संकेत दिया कि आवश्यकता पड़ने पर शस्त्र धारण भी जरूरी हो सकता है।
घोषणा के अनुसार, ‘शंकराचार्य चतुरंगिणी’ एक संगठित संरचना होगी, जो चार प्रमुख आधारों मनबल, तनबल, जनबल और धनबल पर कार्य करेगी। मनबल के अंतर्गत संत, विद्वान, पुरोहित, वकील और मीडिया से जुड़े लोग बौद्धिक मोर्चा संभालेंगे, जबकि तनबल में प्रशिक्षित योद्धा प्रत्यक्ष रक्षा की जिम्मेदारी निभाएंगे।

संगठन में प्राचीन भारतीय सैन्य व्यवस्था के अनुरूप 9 स्तरीय पदानुक्रम निर्धारित किया गया है, जिसमें पत्तिपाल से लेकर महासेनापति तक पद शामिल होंगे। प्रत्येक स्तर के लिए स्पष्ट दायित्व और प्रोटोकॉल तय किए जाएंगे।
विशेष बात यह है कि संगठन के शीर्ष नेतृत्व में पुरुष, महिला और तृतीय लिंग के प्रतिनिधियों को शामिल करने की योजना बनाई गई है, जिससे सामाजिक संतुलन बना रहे।
इस ‘चतुरंगिणी’ का मुख्य उद्देश्य सनातन समाज के भीतर व्याप्त भय को समाप्त कर उसे आत्मविश्वासी बनाना बताया गया है, ताकि कोई भी व्यक्ति अन्याय के खिलाफ निर्भय होकर आवाज उठा सके।
घोषणा के साथ ही इस संगठन के लिए पंजीकरण प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है और देशभर के लोगों से इसमें जुड़ने का आह्वान किया गया है।
इस ऐलान के बाद सामाजिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है और यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह पहल भविष्य में किस दिशा में आगे बढ़ती है।

