अब नगर निगम नहीं, वन विभाग संभालेगा बंदरों की कमान

अब नगर निगम नहीं, वन विभाग संभालेगा बंदरों की कमान

वाराणसी (जनवार्ता) । शहर में बंदरों के बढ़ते आतंक पर अब लगाम लगाने की जिम्मेदारी नगर निगम से हटाकर पूरी तरह वन विभाग को सौंप दी गई है। उत्तर प्रदेश शासन के इस फैसले से लंबे समय से चली आ रही विभागीय खींचतान खत्म हो गई है और शहरवासियों को राहत मिलने की उम्मीद जागी है।

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इलाहाबाद हाईकोर्ट में विनीत शर्मा व अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य की जनहित याचिका पर सुनवाई के क्रम में शासन ने यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। हाल ही में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक के बाद विशेष सचिव, नगर विकास विभाग ने आदेश जारी कर दिए हैं।

आदेश के अनुसार, अब पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग बंदरों को पकड़ने, उनके प्रबंधन और पुनर्वास की मुख्य जिम्मेदारी संभालेगा। वन विभाग को एक महीने के भीतर समेकित कार्ययोजना तैयार कर शासन को प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। इस योजना में बंदरों को पकड़ने, उन्हें सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करने और पुनर्वास की पूरी रूपरेखा शामिल होगी।

नगर निगम और अन्य संबंधित विभाग वन विभाग को पूर्ण सहयोग प्रदान करेंगे। बैठक में यह भी तय हुआ कि भारतीय जीव-जंतु कल्याण बोर्ड द्वारा सुझाई गई संशोधित कार्ययोजना को भी वन विभाग अपनी योजना में शामिल करेगा।

शासन ने स्पष्ट किया कि बंदर वन्य जीव की श्रेणी में आते हैं। इसलिए उनका प्रबंधन और पुनर्वास नगर निगम के बजाय वन विभाग की विशेषज्ञता वाले क्षेत्र में आता है। पहले विभागों के बीच अधिकार क्षेत्र को लेकर होने वाली बहस से बंदर पकड़ने का काम प्रभावित होता था, अब जवाबदेही तय होने से ठोस कार्रवाई शुरू हो सकेगी।

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यह फैसला पूरे उत्तर प्रदेश के उन शहरों पर लागू होगा, जहां बंदरों के हमलों से लोग परेशान हैं। वाराणसी में भी घरों, दुकानों और मंदिर क्षेत्रों में बंदरों का उत्पात आम शिकायत रही है।

नगर निगम आयुक्त ने कहा, “शासन के आदेश का पालन करते हुए हम वन विभाग को हर संभव सहयोग देंगे। शहरवासियों से अपील है कि वे बंदरों से संबंधित शिकायतें अब संबंधित वन अधिकारियों को करें।”

वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि कार्ययोजना तैयार करने की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी, जिसमें स्थानीय स्थिति का आकलन भी शामिल होगा।

यह निर्णय हाईकोर्ट के निर्देशों और शासन की उच्च स्तरीय बैठक के आधार पर लिया गया है, जिससे बंदर समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में सकारात्मक कदम माना जा रहा है।

Shiv murti

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