वाराणसी : मणिकर्णिका घाट जाते सपा नेताओं को पुलिस ने रोका
वीरेंद्र सिंह धरने पर, हाउस अरेस्ट
वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर चल रहे सौंदर्यीकरण और मजबूतीकरण कार्य को लेकर राजनीतिक विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। गणतंत्र दिवस से ठीक एक दिन पहले रविवार (25 जनवरी 2026) को समाजवादी पार्टी (सपा) के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने घाट की वास्तविक स्थिति का जायजा लेने के लिए वहां पहुंचने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें बलपूर्वक रोक दिया।


इस घटना के बाद सपा सांसद वीरेंद्र सिंह अपने आवास के बाहर धरने पर बैठ गए । पुलिस ने वीरेंद्र सिंह सहित एक दर्जन से अधिक सपा नेताओं को हाउस अरेस्ट में रखा है, जिसमें एमएलसी आशुतोष सिन्हा भी शामिल हैं। सर्किट हाउस के बाहर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है, और पूरे इलाके में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।
सपा नेताओं का आरोप है कि प्रशासन उन्हें लोकतांत्रिक तरीके से जांच करने और सच्चाई जानने से रोक रहा है। वे घाट पर कथित तोड़-फोड़, मूर्तियों और प्राचीन संरचनाओं (जैसे मढ़ी) को नुकसान पहुंचाने की जांच करना चाहते थे। वीरेंद्र सिंह ने इसे विपक्ष की आवाज दबाने की साजिश करार दिया और कहा कि प्रशासन तथ्यों को सामने नहीं आने दे रहा, बल्कि लाठीचार्ज की धमकी दी गई।
यह विवाद साल की शुरुआत से ही गरमाया हुआ है, जब घाट के विकास कार्य के दौरान एक प्राचीन उठी हुई चबूतरा (मढ़ी) के टूटने की खबरें आईं। विपक्षी दलों ने इसे मंदिरों, मूर्तियों और धार्मिक धरोहर की तोड़-फोड़ बताया, जबकि प्रशासन का दावा है कि कोई पूजा स्थल या मंदिर क्षतिग्रस्त नहीं हुआ केवल पुरानी और अनधिकृत संरचनाएं हटाई गई हैं, तथा सभी मूर्तियां सुरक्षित रखी गई हैं।
सोशल मीडिया पर AI-जनरेटेड फर्जी तस्वीरें और पुरानी इमेज वायरल होने से अफवाहें फैलीं, जिसके चलते 8 से अधिक एफआईआर दर्ज की गई हैं। अखिलेश यादव के निर्देश पर सपा ने 25 जनवरी को 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल भेजने की योजना बनाई थी, लेकिन पुलिस की सख्ती के कारण यह संभव नहीं हो सका। कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी की और प्रशासन पर लोकतंत्र का गला घोंटने का आरोप लगाया।
मणिकर्णिका घाट हिंदू धर्म में अंतिम संस्कार का प्रमुख पवित्र स्थल है, और यहां का कोई भी विकास कार्य धार्मिक संवेदनशीलता से जुड़ा होता है। सपा नेता कहते हैं कि वे डरने वाले नहीं हैं और जांच के अधिकार के लिए संघर्ष जारी रखेंगे। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि उन्हें घाट पर जाने की अनुमति दी जाए ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।

