वाराणसी : निजी क्लिनिक में गर्भवती महिला का शिशु मृत
पुलिस पर दबाव का आरोप
वाराणसी (जनवार्ता) : बड़ागांव थाना क्षेत्र के सेहमलपुर गांव में स्थित मंजू क्लिनिक पर चिकित्सकीय लापरवाही और गंभीर कदाचार के गंभीर आरोप लगे हैं। क्लिनिक पर आरोप है कि इलाज के दौरान लापरवाही बरतने से एक गर्भवती महिला के नवजात शिशु की मौत हो गई, महिला का मूत्राशय फट गया और बिना लिखित सहमति के उनकी बच्चेदानी (गर्भाशय) भी निकाल दी गई। पीड़ित परिवार ने क्लिनिक संचालक डॉ. मंजू शर्मा एवं उनके स्टाफ के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

पीड़ित नंदलाल पटेल ने बताया कि उनकी पत्नी का पिछले सात महीनों से इसी क्लिनिक में गर्भावस्था का इलाज चल रहा था। 2 मार्च को जांच के दौरान इंजेक्शन लगाए जाने के बाद महिला की हालत अचानक बिगड़ गई। प्रसव प्रक्रिया में कथित तौर पर अत्यधिक दबाव डालने और लापरवाही के कारण नवजात शिशु की मौत हो गई, साथ ही महिला का ब्लैडर (मूत्राशय) फट गया।
परिजनों ने तत्काल महिला को प्राइमेक्स हॉस्पिटल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने बताया कि ब्लैडर गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो चुका है और शरीर में खून की मात्रा बेहद कम रह गई है। सबसे चौंकाने वाला आरोप यह है कि क्लिनिक में बिना किसी लिखित सहमति या इनफॉर्म्ड कंसेंट के महिला की बच्चेदानी निकाल दी गई।
परिवार का कहना है कि क्लिनिक ने इलाज से संबंधित कोई भी मेडिकल रिकॉर्ड, दवा की रसीदें या अन्य दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए, जिससे साक्ष्य छिपाने का संदेह गहरा गया है। नंदलाल पटेल ने बड़ागांव पुलिस से डॉ. मंजू शर्मा और स्टाफ के खिलाफ आईपीसी की धारा 304A (लापरवाही से मौत का कारण बनना), हत्या के प्रयास और अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज करने की मांग की है।
हालांकि, पीड़ित पक्ष का आरोप है कि पुलिस उनकी शिकायत सुनने के बजाय उन पर ही दबाव बना रही है। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में चौकी प्रभारी विवेकानंद द्विवेदी कथित रूप से पीड़ितों को दबाव डालते नजर आ रहे हैं, जिससे पुलिस की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं।

