प्रधानमंत्री ने 72वीं सीनियर नेशनल वॉलीबाल चैंपियनशिप का वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए किया उद्घाटन

प्रधानमंत्री ने 72वीं सीनियर नेशनल वॉलीबाल चैंपियनशिप का वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए किया उद्घाटन

खिलाड़ियों को दी मलइयो का आनंद लेने की सलाह

वाराणसी (जनवार्ता)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को वाराणसी के डॉ. संपूर्णानंद स्पोर्ट्स स्टेडियम में आयोजित 72वीं सीनियर नेशनल वॉलीबाल चैंपियनशिप का वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाया और बनारस की संस्कृति व स्वादिष्ट व्यंजनों का जिक्र करते हुए उन्हें स्थानीय मिठाई मलइयो का आनंद लेने की सलाह दी। पीएम मोदी ने कहा कि बनारस में इस समय ठंड का मौसम है, जो विभिन्न स्वादिष्ट व्यंजनों का लुत्फ उठाने का सही समय है। उन्होंने खिलाड़ियों को बाबा विश्वनाथ के दर्शन और गंगा स्नान के साथ-साथ बनारस की प्रसिद्ध मलइयो चखने की सलाह दी। प्रधानमंत्री ने इसे अमृत तुल्य बताया और कहा कि इसका स्वाद इतना अनोखा है कि पता ही नहीं चलता कि यह खाया जा रहा है या पिया जा रहा है।

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बनारसी मलइयो वाराणसी की सिग्नेचर विंटर डेजर्ट है, जो केवल सर्दियों (नवंबर से फरवरी) में मिलती है। यह दूध के झाग से बनने वाली हल्की, फूहीदार मिठाई है, जिसमें ओस की बूंदों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। जितनी ज्यादा ओस पड़ती है, उतना ही बेहतरीन इसका स्वाद बनता है। पारंपरिक तरीके से मलइयो बनाने की प्रक्रिया में पूर्ण वसा वाले ताजे दूध को बड़े कड़ाह में उबाला जाता है, फिर चीनी, केसर और इलायची मिलाकर धीमी आंच पर पकाया जाता है। रात में इसे खुले आसमान के नीचे रखा जाता है, जहां ओस की बूंदें दूध पर गिरती हैं और झाग बनाने में मदद करती हैं। सुबह भोर में दूध को हाथ से या पारंपरिक सील-लोढ़े से लंबे समय तक मथा जाता है, जिससे गाढ़ा झाग (फेन) अलग हो जाता है। इस झाग में केसर, पिस्ता, बादाम जैसे ड्राई फ्रूट्स डाले जाते हैं और मिट्टी के कुल्हड़ में परोसा जाता है। यह मिठाई मुंह में रखते ही घुल जाती है और इसका पीला-केसरिया रंग व खुशबू इसे खास बनाती है। देश-विदेश से पर्यटक सर्दियों में बनारस केवल मलइयो चखने आते हैं।

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चैंपियनशिप में 28 राज्यों की 58 टीमें हिस्सा ले रही हैं, जो 11 जनवरी तक चलेगी। खिलाड़ियों ने पीएम के संदेश की सराहना की और कहा कि वे मलइयो का स्वाद जरूर लेंगे। इस आयोजन से न केवल खेल को बढ़ावा मिल रहा है, बल्कि बनारस की समृद्ध संस्कृति और परंपराओं को भी राष्ट्रीय स्तर पर उजागर किया जा रहा है।

Shiv murti

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