वाराणसी : संत नगर कॉलोनी, पाल बस्ती में नगर निगम की तानाशाही के खिलाफ उबला जनाक्रोश
वाराणसी (जनवार्ता): संत नगर कॉलोनी पाल बस्ती (चितईपुर-चुनार रोड क्षेत्र) के निवासियों ने नगर निगम वाराणसी के हठधर्मी रवैये और तानाशाही के खिलाफ शांतिपूर्ण धरना शुरू कर दिया है। कॉलोनी को नगर निगम वार्ड में शामिल किए जाने के बाद भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित रखा गया है, जबकि अब रिहायशी क्षेत्र के बीच में कूड़ाघर बनाने की कोशिश की जा रही है, जिसका स्थानीय लोग तीखा विरोध कर रहे हैं।


निवासियों का आरोप है कि नगर निगम प्रशासन कॉलोनी में सड़कों की जर्जर हालत सुधारने, स्ट्रीट लाइट लगाने जैसी बुनियादी सुविधाएं तो नहीं दे रहा, लेकिन कूड़ा डंपिंग साइट, चार्जिंग स्टेशन या कूड़ा ढोने वाले वाहनों का स्टैंड बनाने की बातें बदल-बदलकर जनता को भ्रमित कर रहा है। लोग स्पष्ट कहते हैं कि कूड़े से संबंधित किसी भी व्यवस्था को वे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगे।
धरना स्थल पर मौजूद महिलाओं और पुरुषों ने बताया कि इस जगह पर अगर कुछ बनाना ही है तो पार्क या कम्युनिटी सेंटर क्यों नहीं बनाया जा रहा? कूड़ाघर से बड़े बुजुर्गों और बच्चों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ेगा। विकास समिति की ओर से अपर नगर आयुक्त और महापौर को ज्ञापन दिया गया, लेकिन कोई ठोस जवाब नहीं मिला। इसके बाद प्रधानमंत्री के संसदीय कार्यालय गुरुधाम कॉलोनी में प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना को भी पत्रक सौंपा गया, फिर भी निराशा ही हाथ लगी।
अंततः विवश होकर स्थानीय जनता ने अपनी कॉलोनी में ही शांतिपूर्ण धरना देकर शासन-प्रशासन को जागृत करने का प्रयास शुरू किया है।
धरने में प्रमुख रूप से ज्योति वर्मा, वन्दना वर्मा, लक्ष्मीना देवी, सुनीता कुमारी, आशा देवी, शुभा, नगीना देवी, चंद्रावती देवी, मुन्नी देवी, कौशल पाल, राहुल वर्मा, दिनेश पाल, चन्द्रशेखर पाल, कन्हैया लाल पाल, शिवपूजन पाल, राकेश कुमार, सुरेश त्रिपाठी, दिलीप पटेल, सतीश कुमार, जितेन्द्र पाल, मन्नालाल पाल, उमेश यादव, दिनेश कुमार पाण्डेय, शुभम सेठ सहित सैकड़ों स्थानीय निवासी शामिल रहे।
निवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि नगर निगम तुरंत प्रस्तावित कूड़ाघर योजना को निरस्त नहीं करता और जनहित में पार्क या कम्युनिटी सेंटर बनाने की व्यवस्था नहीं करता, तो आंदोलन और व्यापक रूप लेगा। उन्होंने नगर निगम से अपील की है कि रिहायशी इलाके के बीच कूड़े की कोई भी व्यवस्था न की जाए और कॉलोनी को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।

