सारे बोलो जी जय तुलसी जय श्याम
“सारे बोलो जी जय तुलसी जय श्याम” एक ऐसा भक्ति भाव से भरा आह्वान है जो भगवान श्रीकृष्ण (श्याम) और तुलसी माता के प्रति श्रद्धा को एक साथ जोड़ता है। यह भाव हमें सिखाता है कि जब हम सच्चे मन से तुलसी माता की पूजा और श्रीकृष्ण का नाम स्मरण करते हैं, तो हमारे जीवन में सुख, शांति और सौभाग्य का संचार होता है। इस मंत्र की ध्वनि में प्रेम, आस्था और ईश्वर के प्रति समर्पण की झंकार सुनाई देती है, जो हर हृदय को भक्ति के रस में भीगा देती है।

श्रीतुलसी-शालिग्राम गाथा
सारे बोलो जी, जय तुलसी जय श्याम।
जय जय विष्णु-हरि वृंदा वर, जय जय शालिग्राम।।
जालन्धर राक्षस ने जग में, था उत्पात मचाया।
शिव उपासक सति वृंदा के, तप बल उसे बचाया।।
पार्वती पाने को जलन्धर, पहुँच गया शिवधाम – सारे बोलो…
अन्तर्ध्यान हो पार्वती मां, पहुँची विष्णु पास।
जालन्धर का नाश करो हरि, हरो जगत का त्रास।।
ऋषि रूप धर विष्णु विश्वपति,पहुँचे वृंदा ठाम – सारे बोलो…
परम कौतुकी, परम कृपालु, लीला अजब रचाई।
देख कर कटा सीस पति का, वृंदा थी घबराई।।
बोली सति, पतिदेव को जिंदा,करदो हे दयाधाम – सारे बोलो…
जालन्धर को कर जिंदा, हरि कीया उसमें प्रवेश।
छली गयी वृंदा बेचारी, भंग हुआ सति तेज़।।
मारा गया जालन्धर युद्ध में, पहुँच गया हरिधाम – सारे बोलो…
वृंदा सति के शाप से विष्णु, हो गये शिला समान।
भस्म हुई पति संग वृंदा,पायो कीर्ति मान।।
तुलसी बनकर उगी भस्म से, वरयो शालिग्राम – सारे बोलो…
कहा विष्णु वृंदा तुम मुझको, लक्ष्मी से भी प्यारी।
तुलसी रूप में पूजा करेगी, तुम्हे यह दुनिया सारी।।
होगी तुलसी से ही ‘‘मधुप’’ अब, पूजा शालिग्राम – सारे बोलो… ।
तुलसी और श्रीकृष्ण की आराधना
- समय: ब्रह्म मुहूर्त (सुबह सूर्योदय से पहले) या संध्या आरती के समय।
- स्थान: घर के आंगन या मंदिर में जहाँ तुलसी का पौधा हो।
- सामग्री: दीपक, जल, फूल, तुलसीदल, धूप और श्रीकृष्ण का चित्र या मूर्ति।
- पूजन क्रम:
- सबसे पहले तुलसी माता के समक्ष दीपक जलाएँ और पुष्प अर्पित करें।
- श्रीकृष्ण को तुलसीदल चढ़ाएँ और यह मंत्र बोलें — “सारे बोलो जी जय तुलसी जय श्याम।”
- भक्ति भाव से श्याम का नाम जपें और मन ही मन अपनी मनोकामनाएँ कहें।
- अंत में आरती करें और प्रसाद ग्रहण करें।
- भाव: तुलसी माता को माता समान सम्मान दें और श्याम के प्रति सच्ची भक्ति से मन को एकाग्र रखें।
तुलसी और श्याम भक्ति से मिलने वाले फल
- घर में शुद्धता, सकारात्मक ऊर्जा और शांति का वातावरण बनता है।
- रोग, संकट और नकारात्मक विचारों से रक्षा होती है।
- संतान, सुख-समृद्धि और वैवाहिक सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
- मन में भक्ति, दया और प्रेम का भाव बढ़ता है।
- जीवन में आत्मिक संतुलन और संतोष का अनुभव होता है।
निष्कर्ष
“सारे बोलो जी जय तुलसी जय श्याम” केवल एक भक्ति गीत नहीं, बल्कि एक दिव्य संदेश है जो हमें ईश्वर से जोड़ता है। तुलसी माता की महिमा और श्रीकृष्ण के नाम का संगम जीवन को पवित्र बना देता है। जब हम प्रेम और भक्ति से यह जयकार करते हैं, तो ऐसा लगता है मानो स्वयं भगवान हमारे जीवन में उतर आए हों। सच्चे मन से किया गया यह नामस्मरण हर दुःख को दूर करता है और हमारे हृदय में ईश्वर के प्रति अमिट प्रेम और शांति का प्रकाश फैलाता है।

