रघुवर की नज़रों का इशारा हो जाए | प्रभु श्रीराम की कृपा दृष्टि पाने की विनम्र प्रार्थना

रघुवर की नज़रों का इशारा हो जाए | प्रभु श्रीराम की कृपा दृष्टि पाने की विनम्र प्रार्थना

“रघुवर की नज़रों का इशारा हो जाए” — यह पंक्ति सच्चे भक्त के हृदय की गहराई से निकली हुई पुकार है। इसमें उस दिव्य क्षण की कामना है जब भगवान श्रीराम मात्र एक दृष्टि से ही अपने भक्त के जीवन को धन्य कर दें। भक्त को विश्वास होता है कि रघुवर की एक नज़र भी जीवन की सारी कठिनाइयाँ मिटा सकती है। यह भाव हमें विनम्रता, श्रद्धा और ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण का संदेश देता है। हर बार इस पंक्ति का स्मरण करते हुए मन में प्रभु के प्रति एक मधुर लगाव और आश्रय की भावना जाग उठती है।

rajeshswari

एक बार जो रघुवर की,
नजरो का इशारा हो जाये,
तेरी लगन में खो जाऊ,
दुनिया से किनारा हो जाये…….

श्री राम तुम्हारे चरणों मे,
आशीष सभी को मिलता हैं,
यह धूल तुम्हारी मिल जाये,
जीवन का सहारा हो जाये,
एक बार जो रघुवर की,
नजरो का इशारा हो जाये…..

सरकार तुम्हारी महफ़िल में
तक़दीर बनाई जाती हैं
मेरी भी बिंगड़ी बन जाये
एहसान तुम्हारा हो जाये,
एक बार जो रघुवर की,
नजरो का इशारा हो जाये…..

ये श्री राम का मंदिर हैं
भागीरथी गंगा बहती हैं
सब लोग यहाँ पर तरते हैं
भव पार सभी का हो जाये,
एक बार जो रघुवर की,
नजरो का इशारा हो जाये…..

विधि भक्ति भाव से पाठ या स्मरण करने की विधि

  1. स्थान और समय: सुबह या संध्या के समय शांत वातावरण में बैठें।
  2. पूजा की तैयारी: श्रीराम, माता सीता और हनुमान जी के चित्र या मूर्ति के सामने दीपक जलाएँ।
  3. मन की स्थिरता: गहरी सांस लेकर मन को शांत करें और हृदय में “जय श्रीराम” का जाप करें।
  4. भावपूर्ण जप या गान: “रघुवर की नज़रों का इशारा हो जाए” पंक्ति को श्रद्धा से दोहराएँ या भजन स्वरूप गाएँ।
  5. भक्ति की भावना रखें: हर बार यह महसूस करें कि प्रभु आपकी ओर प्रेम से देख रहे हैं और अपनी कृपा बरसा रहे हैं।
  6. समापन: अंत में नम्रता से प्रणाम करें और प्रभु से आशीर्वाद माँगें — “हे रघुवर, अपनी दृष्टि मेरे जीवन पर बनाए रखें।”
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लाभ इस भक्ति से मिलने वाले आध्यात्मिक फल

  • मन में शांति और स्थिरता आती है।
  • कठिन परिस्थितियों में साहस और विश्वास बढ़ता है।
  • प्रभु श्रीराम की कृपा और मार्गदर्शन का अनुभव होता है।
  • नकारात्मकता और भय दूर होकर सकारात्मक ऊर्जा आती है।
  • जीवन में भक्ति, विनम्रता और समर्पण की भावना मजबूत होती है।

निष्कर्ष

“रघुवर की नज़रों का इशारा हो जाए” यह भावना दर्शाती है कि भक्त के लिए प्रभु की एक दृष्टि ही सब कुछ है। जब प्रभु श्रीराम की नज़रों में प्रेम और कृपा का इशारा मिलता है, तो जीवन की हर राह प्रकाशित हो जाती है। यह भक्ति हमें याद दिलाती है कि सच्ची कृपा बाहरी साधनों से नहीं, बल्कि ईश्वर की दया दृष्टि से मिलती है। आइए, हम सब मन, वचन और कर्म से ऐसे जीवन जिएँ कि रघुवर की नज़र सदा हम पर बनी रहे। 🌼

Shiv murti

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