मंगल मूर्ति रूप लेकर गणपति जी आ गए
“मंगल मूर्ति रूप लेकर गणपति जी आ गए” यह वाक्य भक्ति और आनंद का अद्भुत संगम है। जब भगवान गणेश का आगमन होता है, तो ऐसा लगता है मानो सम्पूर्ण वातावरण में पवित्रता और शुभता की वर्षा हो रही हो। गणपति बाप्पा केवल देवता नहीं, बल्कि प्रेम, करुणा और सौभाग्य के प्रतीक हैं। उनके आने से घर में उत्सव का माहौल बन जाता है और हर हृदय श्रद्धा से भर उठता है। यह भाव हमें याद दिलाता है कि जब जीवन में भक्ति और विश्वास का दीप जलता है, तब स्वयं मंगलमूर्ति गणेश हर विघ्न को हरने आ जाते हैं।

मंगल मूर्ति रूप लेकर गणपति जी आ गए,
भक्त जनों के दिल पर देवा, दूर दूर तक छा गए,
गणपति बप्पा मोरया मंगलमूर्ति मोरया….
अब ना कोई दुखी रहेगा देवा का आशीष बरसेगा,
अंधे को आँखे मिलेंगी, लंगड़ा भी अब दौड़ पड़ेगा,
भक्ति की सच्ची लगन, सद् भक्तों को लगा गए,
मंगलमूर्ति रूप लेकर गणपति जी आ गए…..
शिव शक्ति के लाल प्यारे, देते हैं सुख के उजियारे,
तीनों लोक में गूँज रहे हैं, सिद्धि विनायक के जयकारे,
कितनी ही डगमग नैया को बप्पा पार लगा गए,
मंगल मूर्ति रूप लेकर गणपति जी आ गए……
इच्छा पूर्ति कहलाते हैं, कृपा अमृत बरसाते हैं,
प्रेम से सबको निहारते हैं, भाग्य सबके सँवारते हैं,
जीवन की मुरझाई बगिया, सुगंध से महका गए,
मंगलमूर्ति रूप लेकर गणपति जी आ गए…..
अहंकार का नाश करते, भक्तों के घर वास करते,
अपने दिव्य चमत्कार से, पतझड़ को मधुमास करते,
घर आंगन में रंग बिरंगे, सुख के फूल खिला गए,
मंगल मूर्ति रूप लेकर गणपति जी आ गए…….
गणेश जी के स्वागत और पूजन की विधि
- समय: गणेश चतुर्थी या बुधवार के दिन प्रातःकाल शुभ मुहूर्त में।
- स्थान: घर का पूजास्थल या सजा हुआ मंडप।
- सामग्री: दूर्वा, लाल फूल, मोदक, दीपक, धूप, चंदन और जल।
- पूजन क्रम:
- सबसे पहले गणेश जी की मूर्ति या चित्र को स्वच्छ कपड़े से पोंछें।
- दीपक जलाकर “ॐ गण गणपतये नमः” मंत्र का 11 बार जप करें।
- फूल, दूर्वा और मोदक अर्पित करें।
- परिवार के साथ “जय गणेश देवा” आरती करें।
- अंत में “मंगल मूर्ति रूप लेकर गणपति जी आ गए” का जयकारा लगाएँ।
- भाव: स्वागत का भाव प्रेम, उल्लास और समर्पण से भरा होना चाहिए — मानो बाप्पा स्वयं घर के सदस्य बनकर आए हों।
गणेश पूजन से प्राप्त होने वाले शुभ फल
- घर में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता है।
- जीवन के विघ्न और बाधाएँ समाप्त होती हैं।
- कार्यसिद्धि, सौभाग्य और सफलता मिलती है।
- परिवार में प्रेम, एकता और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।
- मन में भक्ति, विनम्रता और आत्मविश्वास की वृद्धि होती है।
निष्कर्ष
“मंगल मूर्ति रूप लेकर गणपति जी आ गए” यह भाव हमें याद दिलाता है कि जब हम सच्चे मन से गणपति बाप्पा का स्वागत करते हैं, तो जीवन के हर कोने में मंगल का प्रकाश फैल जाता है। गणेश जी का आगमन केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि हमारे जीवन में नई शुरुआत और शुभता का प्रतीक है। उनकी कृपा से कठिन रास्ते भी सहज हो जाते हैं और मन में विश्वास का दीप जलता है। इसलिए हर बार पूरे प्रेम से कहें — “मंगल मूर्ति रूप लेकर गणपति जी आ गए, विघ्न हरे, सुख बरसाएँ।”

