वो माँ अंजनी का लाला है | शक्ति, भक्ति और नम्रता का स्वरूप
“वो माँ अंजनी का लाला है” — यह पंक्ति भक्तों को भगवान हनुमान जी की उस बालरूप लीला की याद दिलाती है, जिसमें वे अपनी माता अंजनी के स्नेह से लबालब प्रेम में पले-बढ़े। यह भाव केवल वीरता का नहीं, बल्कि ममता और समर्पण का भी प्रतीक है। हनुमान जी वो हैं जो शक्ति में अपार, परंतु विनम्रता में अतुलनीय हैं। जब कोई भक्त इस पंक्ति को भाव से गाता है, तो उसके भीतर भी साहस, प्रेम और भक्ति का संचार होता है।

जो भगतो का रखवाला वो माँ अंजनी का लाला है……..
मंगल भवन अमंगल हारी दरभु सुदसरथ अवध बिहारी,
वो तो मंगल करने वाला है वो माँ अंजनी का लाला है…..
सकंट कटे मिटे सब पीड़ा जो सुमिरे हनुमत बलबीरा,
वो तो संकट हरने वाला है वो माँ अंजनी का लाला है……
रघुकुल रीत सदा चली आई प्राण जाए पर वचन न जाई,
वो तो वचन निभाने वाला है वो माँ अंजनी का लाला है……
जो भगतो का रखवाला वो माँ अंजनी का लाला है……
भक्ति भाव से गाने या जप करने की विधि
- स्थान और तैयारी: मंगलवार या शनिवार के दिन हनुमान मंदिर या घर में हनुमान जी की प्रतिमा के समक्ष दीपक जलाएँ।
- प्रारंभ: श्रीराम और हनुमान जी का ध्यान करते हुए “जय हनुमान” तीन बार कहें।
- भजन या जप: श्रद्धा और प्रेम से “वो माँ अंजनी का लाला है” भजन को सुनें या गाएँ।
- भावना रखें: यह अनुभव करें कि हनुमान जी स्वयं आपके सामने अपने बालरूप में खड़े होकर मुस्कुरा रहे हैं।
- समापन: अंत में हनुमान चालीसा या “राम नाम” का जाप करें और विनम्रता से प्रणाम करें।
इस भक्ति भाव से मिलने वाले लाभ
- साहस और आत्मविश्वास: हनुमान जी की कृपा से भय और संदेह दूर होते हैं।
- मन की शांति: भक्ति से मन स्थिर और संतुलित होता है।
- सकारात्मक ऊर्जा: घर में शक्ति, उत्साह और पवित्रता का संचार होता है।
- संकट से रक्षा: प्रभु हनुमान जी अपने भक्तों की हर कठिनाई में रक्षा करते हैं।
- भक्ति की गहराई: श्रीराम और हनुमान जी के प्रति प्रेम और समर्पण बढ़ता है।
निष्कर्ष
“वो माँ अंजनी का लाला है” — यह पंक्ति केवल हनुमान जी की स्तुति नहीं, बल्कि उनके प्रेम और निष्ठा का गुणगान है। हनुमान जी हमें सिखाते हैं कि शक्ति का सच्चा अर्थ सेवा और समर्पण में है। जब हम इस भजन को भाव से गाते हैं, तो हमारे जीवन में निडरता और भक्ति का प्रकाश फैल जाता है।

