बड़ी दूर से चलकर आया हूं | भक्त का समर्पण और श्याम प्रेम की अद्भुत कहानी
बड़ी दूर से चलकर आया हूं यह वाक्य उस भक्त की आत्मा की पुकार है जिसने अपने प्रभु के दर्शन की आस में लंबा सफर तय किया है। जब मन भक्ति से भर जाता है, तो दूरी और थकान का कोई अर्थ नहीं रह जाता। खाटू श्याम बाबा के दरबार में पहुँचकर भक्त को वह शांति मिलती है, जिसकी खोज में वह सारी राहें पार करता है। यह भावना केवल यात्रा की नहीं, बल्कि आत्मा के उस मिलन की है जहाँ विश्वास और प्रेम एक हो जाते हैं।

बड़ी दूर से चल कर आया हु,
मेरे बाबा तेरे दर्शन के लिए,
एक फूल गुलाब का लाया हु चरणों में तेरे अर्पण के लिए,
नरोली मोली चावल है न धन दौलत की थैली है,
दो आंसू बचा कर लाया हु पूजा तेरी करने के लिये,
बड़ी दूर से चल कर आया हु….
ना रंग महल की अभिलाषा ना ईशा सोने चाँदी की,
तेरी दया की दौलत काफी है झोली मेरी भरने के लिये,
बड़ी दूर से चल कर आया हु…..
मेरे बाबा मेरी ईशा नहीं अब यहाँ से वापिस जाने की,
चरणों में जगह दे दो थोड़ी मुझे जीवन भर रहने के लिये,
बड़ी दूर से चल कर आया हु…
भाव से पूजन या स्मरण विधि
- दिन: किसी शुभ वार (विशेषकर गुरुवार या रविवार) को चुनें।
- स्थान: घर के मंदिर में या श्याम बाबा के चित्र के सामने दीपक जलाएँ।
- सामग्री: फूल, चंदन, मोरपंख, धूप, दीपक, और प्रसाद (खीर या चूरमा)।
- प्रारंभ: “जय श्री श्याम” का 11 बार नाम जप करें।
- पूजन: बाबा को फूल और चंदन अर्पित करें, और मन में यह भाव रखें कि आप दूर-दूर से उनके चरणों में आए हैं।
- भाव: कहें — “हे श्याम बाबा, मुझे सदा अपने चरणों का मार्ग दिखाओ और मेरे प्रयासों को सफल करो।”
- समापन: आरती करें और बाबा से अपने जीवन में भक्ति की दृढ़ता और परिवार की सुख-शांति की प्रार्थना करें।
इस भक्ति से मिलने वाले लाभ
- श्याम बाबा की कृपा से मन में शांति और आत्मविश्वास बढ़ता है।
- जीवन के संघर्षों को पार करने की शक्ति मिलती है।
- सच्ची श्रद्धा और संतोष की अनुभूति होती है।
- परिवार में सुख, समृद्धि और एकता बनी रहती है।
- भक्ति और विश्वास का रंग जीवन में स्थायी होता है।
निष्कर्ष
“बड़ी दूर से चलकर आया हूं” केवल यात्रा की थकान नहीं, बल्कि आत्मा की साधना का प्रतीक है। जब भक्त अपने प्रभु तक पहुँचता है, तो उसकी सारी मेहनत भक्ति के आनंद में बदल जाती है। खाटू वाले बाबा अपने हर भक्त का स्वागत प्रेम और कृपा से करते हैं, चाहे वह कितनी भी दूर से आया हो। यह भक्ति हमें सिखाती है कि सच्चे मन से किया गया हर कदम हमें ईश्वर के और करीब ले जाता है — क्योंकि जहां विश्वास है, वहीं भगवान का निवास है।

