जिनके हृदय श्रीराम बसे | प्रेम, शांति और मर्यादा का सजीव स्वरूप

जिनके हृदय श्रीराम बसे | प्रेम, शांति और मर्यादा का सजीव स्वरूप

“जिनके हृदय श्रीराम बसे” — यह पंक्ति उस परम पवित्र अवस्था की पहचान है जहाँ भक्त का मन, वचन और कर्म सब प्रभु के नाम में लीन हो जाते हैं। ऐसे भक्तों का जीवन राममय बन जाता है; उनमें करुणा, प्रेम और सत्य का प्रकाश स्वाभाविक रूप से झलकता है। श्रीराम का वास हृदय में तभी होता है जब मन पवित्र, भाव सच्चे और आचरण मर्यादित हो। यह भाव हमें प्रेरित करता है कि हम भी अपने जीवन में श्रीराम के गुणों को उतारें और उनका स्मरण निरंतर करें।

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जिनके ह्रदय श्री राम बसे,
होठो पे राम का नाम है,
ऐसे परम भक्त हनुमत को,
बारम्बार प्रणाम है,
बोलो राम जय जय राम,
बोलो राम जय जय राम…..

ज्ञानवान गुणवान कृपानिधि,
अतुलित इनकी शक्ति है,
रहते तत्पर प्रभु सेवा में,
धन्य धन्य प्रभु भक्ति है,
राम नाम गुणगान से बढ़ कर,
जिन्हें न कोई काम है,
ऐसे परम भक्त हनुमत को,
बारम्बार प्रणाम है,
बोलो राम सीता राम,
बोलो राम सीता राम……

शक्ति बाण लगा लक्ष्मण को,
संकट में थे प्राण पड़े,
व्याकुल दशा देख रघुवर की,
पवन वेग हनुमान उड़े,
लाये संजीवन प्राण बचाये,
तब कीन्हों विश्राम है,
ऐसे परम भक्त हनुमत को,
बारम्बार प्रणाम है,
बोलो राम सीता राम,
बोलो राम सीता राम……

खुश हो कर जब माँ सीता ने,
दी ईनाम मोती माला,
तंज कसा जब विभीषण ने,
सीना चीर दिखा डाला,
“दास”भक्त के मन मंदिर में,
मुगल छवि सिया राम है,
ऐसे परम भक्त हनुमत को,
बारम्बार प्रणाम है,
बोलो राम सीता राम,
बोलो राम सीता राम……

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विधि इस भाव का जप या भजन करने की विधि

  1. स्थान: घर के पूजा स्थल या किसी शांत जगह पर दीपक जलाएँ।
  2. तैयारी: श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान जी की प्रतिमा या चित्र के सामने पुष्प अर्पित करें।
  3. प्रारंभ: तीन बार “जय श्रीराम” कहकर मन को एकाग्र करें।
  4. भक्ति भाव: “जिनके हृदय श्रीराम बसे” पंक्ति का श्रद्धापूर्वक जप करें या मधुर सुर में भजन के रूप में गाएँ।
  5. ध्यान: कल्पना करें कि आपके हृदय में स्वयं श्रीराम का प्रकाश प्रज्वलित हो रहा है।
  6. समापन: अंत में नमन कर कहें — “हे प्रभु, मेरे हृदय को भी अपने प्रेम से भर दो।”

लाभ इस भाव के आध्यात्मिक और मानसिक लाभ

  • मन की शांति: हृदय में ईश्वर का वास होने से चिंता और भय दूर होते हैं।
  • सकारात्मक ऊर्जा: हर कार्य में प्रभु का आशीर्वाद महसूस होता है।
  • सद्गुणों का विकास: सत्य, प्रेम, करुणा और मर्यादा स्वतः जीवन का हिस्सा बनते हैं।
  • भक्ति में वृद्धि: श्रीराम के प्रति प्रेम और श्रद्धा और गहरी होती है।
  • सुख और संतोष: जीवन में आत्मिक आनंद और स्थिरता आती है।

निष्कर्ष

“जिनके हृदय श्रीराम बसे” — यह पंक्ति हमें सिखाती है कि सच्चा सुख बाहरी वस्तुओं में नहीं, बल्कि प्रभु के प्रेम में बसने में है। जब हमारे हृदय में श्रीराम का वास होता है, तो हमारा हर कार्य पुण्य बन जाता है और हर दिन एक नई प्रेरणा देता है। ऐसे भक्तों के जीवन में न कोई भय रहता है, न अभाव — केवल राम नाम का प्रकाश।

Shiv murti

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