जग जननी तू सबकी पालनहार है | माँ दुर्गा की असीम कृपा और मातृत्व का भाव
जग जननी तू सबकी पालनहार है यह वाक्य माँ के उस असीम प्रेम को दर्शाता है, जो संसार के हर जीव के जीवन में संबल बनता है। माँ शक्ति न केवल सृष्टि की रचयिता हैं, बल्कि हर हृदय की धड़कन में उनका ही वास है। जब भक्त माँ को याद करता है, तो उसके जीवन से भय और अंधकार मिट जाते हैं। माँ अपने हर भक्त का ध्यान ऐसे रखती हैं जैसे एक सच्ची माँ अपने बच्चे का रखती है स्नेह, करुणा और सुरक्षा के साथ। यह भाव हमें याद दिलाता है कि माँ के बिना कोई भी अस्तित्व पूर्ण नहीं।

शेएर : चारे युग प्रताप मां तेरा, तेरे कई अवतार,
वेद पुराणां पर ना पाया, महिमा अपरम्पार |
संता भक्तां दी महाराणी, तीन लोक सरकार,
दास ‘मधुप’ तेरे गुण गावे, बोले जय जयकार ||
जग जननी तूं सबदी पालनहार है ईह सारा संसार तेरा परिवार है ||
तूं ही साडी जीवन जिंदगी,
आरती पूजा भजन बंदगी |
मां तू ही इस जीवन दा आधार है ||
ईह सारा संसार…….
दुख दरिद्र दोष मां हारना,
अवगुण साडे चित ना धरना |
तूं ही करना भव सागर तों पार है ||
ईह सारा संसार…….
अपनी कृपा आप मां करना,
दे मुरादां झोलियां भरना |
दास ‘मधुप’ तेरे चरणां तों बलिहार है ||
ईह सारा संसार…….
भाव से पूजन या स्मरण विधि
- दिन: सोमवार, मंगलवार या शुक्रवार माँ की पूजा के लिए शुभ माने जाते हैं।
- स्थान: घर के मंदिर में माँ दुर्गा या माँ अंबे की तस्वीर या मूर्ति के सामने दीपक जलाएँ।
- सामग्री: लाल फूल, चंदन, घी का दीपक, धूप, कपूर, नारियल, फल और प्रसाद (हलवा-पूरी)।
- प्रारंभ: “जय माँ दुर्गा” या “जय माँ जगदंबे” का 9 बार नाम जप करें।
- पूजन: माँ को फूल और चंदन अर्पित करें, दीपक और धूप दिखाएँ।
- भाव: मन में यह कहें — “हे जग जननी, आप ही हमारी पालनहार हैं, हमें सदा अपने आशीर्वाद से संरक्षित रखें।”
- समापन: आरती करें, माँ के चरणों में प्रणाम करें और परिवार सहित प्रसाद ग्रहण करें।
इस भक्ति से मिलने वाले लाभ
- माँ की कृपा से जीवन में शांति, सुख और समृद्धि आती है।
- भय, नकारात्मकता और दुर्भाग्य से रक्षा होती है।
- मन में शक्ति, आत्मविश्वास और संतुलन का विकास होता है।
- घर-परिवार में प्रेम और सौहार्द बढ़ता है।
- माँ की उपस्थिति से जीवन में हर दिशा में सकारात्मक ऊर्जा फैलती है।
निष्कर्ष
“जग जननी तू सबकी पालनहार है” — यह भाव हमें यह सिखाता है कि संसार की हर शक्ति का स्रोत माँ ही हैं। जब हम अपने जीवन की बागडोर माँ को सौंप देते हैं, तो हर कठिनाई आसान हो जाती है। माँ अपने हर बच्चे की पुकार सुनती हैं, चाहे वह किसी भी स्थिति में हो। उनका आशीर्वाद ही जीवन का सबसे बड़ा कवच है। जो हृदय सच्ची श्रद्धा से माँ को पुकारता है, वहाँ स्वयं देवी शक्ति वास करती हैं, और जीवन अनंत सुख, सुरक्षा और विश्वास से भर जाता है।

