गोरा जी को ब्याहने आए गयो रे मेरा भोला भंडारी

गोरा जी को ब्याहने आए गयो रे मेरा भोला भंडारी

“गोरा जी को ब्याहने आए गयो रे मेरा भोला भंडारी” यह पंक्ति उस दिव्य क्षण का चित्रण करती है जब कैलाशपति भगवान शिव माँ गौरा (पार्वती) से विवाह करने हिमालय लोक में पधारते हैं। यह केवल एक पौराणिक घटना नहीं, बल्कि प्रेम, त्याग और समर्पण का प्रतीक है। भोलेनाथ की बारात भले ही भस्म, सर्प और गणों से सजी हो, पर उनके हृदय में माँ गौरा के लिए असीम प्रेम और सम्मान है। यह भक्ति गीत हमें सिखाता है कि सच्चा प्रेम बाहरी रूप में नहीं, बल्कि आत्मा के भाव में बसता है।

rajeshswari

गोरा जी को ब्याहने आए गयो रे मेरा भोला भंडारी,
भोला भंडारी मेरा कैलाश वासी,
बैल पे चढ़कर आए गयो रे मेरा भोला भंडारी,
गोरा जी को ब्याहने आए गयो रे मेरा भोला भंडारी….

हंस चढ़े ब्रह्मा जी आए,
गरुड़ चढ़े विष्णु जी आए,
कान्हा भी मुरली बजाए गयो रे मेरा भोला भंडारी,
गोरा जी को ब्याहने आए गयो रे मेरा भोला भंडारी….

नौ करोड़ जोगणिया आई,
शक्तिपीठों से देवीया आई,
शेर पर दुर्गा आ गई रे मेरा भोला भंडारी,
गोरा जी को ब्याहने आए गयो रे मेरा भोला भंडारी….

मंगल शनि चंदा सूरज भी आए,
अपनी-अपनी देवियों को लाए,
भूत प्रेत नचाए गयो रे मेरा भोला भंडारी,
गोरा जी को ब्याहने आए गयो रे मेरा भोला भंडारी….

हाथी शेर गरजते आए,
शिव शंकर के मन को भाए,
सबको मस्त बनाए गयो रे मेरा भोला भंडारी,
गोरा जी को ब्याहने आए गयो रे मेरा भोला भंडारी….

शिव-पार्वती विवाह पूजा की विधि

  1. सुबह स्नान कर शिव-पार्वती की मूर्ति या चित्र को स्वच्छ स्थान पर स्थापित करें।
  2. दीपक जलाएँ, गंगाजल, दूध, पुष्प, बेलपत्र और सिंदूर अर्पित करें।
  3. मन में यह भावना रखें — “हे भोले, माँ गौरा के साथ हमारा जीवन भी प्रेम से भरे।”
  4. भक्ति से यह पंक्ति गुनगुनाएँ — “गोरा जी को ब्याहने आए गयो रे मेरा भोला भंडारी।”
  5. अंत में विवाह मंगल और संसार में प्रेम-सौहार्द की प्रार्थना करें।
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शिव विवाह स्मरण से प्राप्त शुभ फल

  • वैवाहिक जीवन में प्रेम, स्थिरता और विश्वास बढ़ता है।
  • घर-परिवार में मंगल और सौख्य का वास होता है।
  • मन में भक्ति, शांति और आध्यात्मिक शक्ति का संचार होता है।
  • कठिनाइयाँ दूर होकर जीवन में समृद्धि और संतोष प्राप्त होता है।
  • शिव-पार्वती कृपा से मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।

निष्कर्ष

“गोरा जी को ब्याहने आए गयो रे मेरा भोला भंडारी” भक्ति का वह सुंदर भाव है जो हमें प्रेम और विनम्रता की राह पर चलना सिखाता है। शिव और पार्वती का यह दिव्य मिलन इस बात का प्रतीक है कि जब आत्मा में ईश्वर का प्रेम जागता है, तब भेद मिट जाते हैं और जीवन में आनंद का प्रकाश फैल जाता है। जो भक्त सच्चे मन से इस भाव का चिंतन करता है, उसके जीवन में शिव की कृपा और गौरा का स्नेह सदा बना रहता है।

Shiv murti

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