भटको चाहे जिधर | प्रभु की ओर लौटने का भाव और सच्ची दिशा का संकेत

भटको चाहे जिधर | प्रभु की ओर लौटने का भाव और सच्ची दिशा का संकेत

“भटको चाहे जिधर” एक ऐसी आध्यात्मिक पंक्ति है जो हमें यह सिखाती है कि चाहे हम जीवन में कितनी भी राहों पर भटक जाएँ, अंततः हमारा ठिकाना प्रभु के चरण ही हैं। यह भजन भक्ति का वह स्वर है जो भटके हुए मन को फिर से ईश्वर की शरण में लौटने का मार्ग दिखाता है। जब जीवन की उलझनों में दिशा धुंधली लगती है, तब यह भाव हमें भीतर से पुकारता है — “लौट आओ, प्रभु तुम्हारा इंतज़ार कर रहे हैं।” यह पंक्ति हमें विश्वास और शांति दोनों प्रदान करती है।

rajeshswari

भटको चाहे जिधर काम बनेगा इधर,
ये है आयोध्या नगर, रामचंद्र का घर,
जय सियाराम जय जय सियाराम,
भटको चाहे जिधर काम बनेगा इधर,
भटको चाहे जिधर काम बनेगा इधर…….

सच्चा साथी है तुम्हारा,
राम जगत के तारणहारा,
सच्चा मार्ग को दिखाते,
राम जगत के पालनहारा,
जो भी लक्ष्य बनाओगे,
सफल हो जाओ उधर……

राम नाम है ताकतवर,
सब कुछ कर दे न्यौछावर,
फिर जो भी करोगे कामना,
राम चन्द कर देंगे तर,
सतबुद्धि ऐसी देगे राम,
हर काम हो जाए सुधर……

विधि भक्ति भाव से करने का तरीका

  1. स्थान और समय: शांत स्थान पर बैठें — भोर या रात का समय उपयुक्त रहता है।
  2. दीपक और सुगंध: प्रभु की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक जलाएँ और धूप चढ़ाएँ।
  3. मन की तैयारी: कुछ क्षण मौन रहें और अपने मन को प्रभु की ओर केंद्रित करें।
  4. पाठ या गान: धीरे-धीरे भावपूर्वक “भटको चाहे जिधर” पंक्ति का जप करें या भजन को गाएँ।
  5. भावना रखें: मन में यह विचार रखें कि चाहे आपने कितनी भी गलती की हो, प्रभु आपको स्नेह से स्वीकार करेंगे।
  6. समापन: अंत में दोनों हाथ जोड़कर कहें — “हे प्रभु, मुझे सच्चे मार्ग पर चलने की शक्ति दो।”
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लाभ इस भक्ति भाव के प्रभाव

  • मन को स्थिरता और शांति मिलती है।
  • गलत राहों से लौटने का साहस प्राप्त होता है।
  • प्रभु में आस्था और भरोसा गहराता है।
  • आध्यात्मिक शक्ति और सकारात्मकता बढ़ती है।
  • जीवन में सही दिशा और उद्देश्य मिलने का अनुभव होता है।

निष्कर्ष

“भटको चाहे जिधर” केवल एक पंक्ति नहीं, बल्कि जीवन का संदेश है — कि चाहे हम कितनी भी राहें बदल लें, प्रभु की कृपा सदैव हमारे साथ रहती है। यह भक्ति भाव हमें याद दिलाता है कि ईश्वर का प्रेम असीम है; वे हमें कभी नहीं त्यागते, बस हमें उनकी ओर लौटने की देर होती है। जब मन यह स्वीकार करता है कि सच्ची दिशा वही है जहाँ प्रभु का नाम है, तब जीवन में स्थिरता और सुकून स्वतः आने लगता है।

Shiv murti

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