सरी दुनिया बसे हे दाई | माँ शक्ति का सर्वव्यापी स्वरूप और कृपा

सरी दुनिया बसे हे दाई | माँ शक्ति का सर्वव्यापी स्वरूप और कृपा

सरी दुनिया बसे हे दाई यह भाव बताता है कि माँ केवल मंदिरों या मूर्तियों में नहीं, बल्कि सृष्टि के हर अंश में बसती हैं। वह हर जीव, हर श्वास और हर भावना में समाई हुई हैं। जब हम किसी में दया, प्रेम या करुणा देखते हैं, वहाँ माँ का ही प्रतिबिंब होता है। माँ दाई अपने अनंत रूपों से संसार का पालन करती हैं — कोई भूखा न रहे, कोई दुखी न हो, यही उनका आशीर्वाद है। माँ की यह सर्वव्यापक उपस्थिति हमें सिखाती है कि ईश्वर की सबसे बड़ी शक्ति ‘माँ’ के रूप में हमारे साथ सदा रहती है।

rajeshswari

सारी दिनिया बसे हे दाई तोर चरन मा ।
महू ला राख लेते दाई तोरे सरन मा ।
मै हा हवाव तोर आधारी, ऐ वो दुर्गा मोर महतारी ।
महू ला राख लेते दाई तोरे सरन मा ।
सरी दुनिया……….

तोर परसादी माया नगर मा पाये हमनखे के चोला ॥
मोर गति बस तोर भरोशा जानत हावव बस तोला ॥
रखले चरन मा सेउक बनाके,भगत के फुटहा भाग ला जागाके
महू ला राख लेते दाई तोरे सरन मा ।
सरी दुनिया……….

कतको तरगे तोर चरन मा, मोर मूड़ ऊपर घलो रखदे ॥
सेवा करत दिन पहावत जाये,अतका किरपा अउ करदे ॥
जनाव नहीं पूजा बिधियाआनी बानी,
भगत कहा के गौतम करथे नादानी
महू ला राख लेते दाई तोरे सरन मा ।
सरी दुनिया……….

श्रेणीदुर्गा भजन

भाव से पूजन विधि

  1. दिन: मंगलवार, शुक्रवार या नवरात्रि के दिन विशेष शुभ माने जाते हैं।
  2. स्थान: अपने घर के मंदिर में माँ की तस्वीर या मूर्ति के सामने दीपक जलाएँ।
  3. सामग्री: लाल या पीले फूल, चंदन, धूप, घी का दीपक, कपूर, नारियल और हलवा-पूरी का प्रसाद।
  4. पूजन क्रम:
    • माँ को फूल चढ़ाएँ और कहें — “माँ, आप सृष्टि के कण-कण में बसती हैं, हमें सद्बुद्धि और शांति दें।”
    • “जय माँ दाई” का 11 बार जप करें।
    • आरती करें और प्रसाद सभी को बाँटें।
  5. भाव: पूजा करते समय मन में यह भाव रखें कि माँ हर दिशा में, हर हृदय में वास करती हैं — वह सबकी माँ हैं।
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इस भक्ति के शुभ परिणाम

  • माँ की कृपा से मन की शांति, संतुलन और आंतरिक सुख मिलता है।
  • घर में सकारात्मक ऊर्जा और सौभाग्य बढ़ता है।
  • भय, रोग और मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है।
  • परिवारिक प्रेम और एकता सुदृढ़ होती है।
  • माँ के नाम का सुमिरन करने से हर कार्य में सफलता और आत्मविश्वास प्राप्त होता है।

निष्कर्ष

यह भाव हमें यह समझाता है कि माँ कहीं दूर नहीं, बल्कि हमारे भीतर और हमारे आस-पास ही हैं। वह हमारी हर पुकार सुनती हैं, चाहे हम किसी भी परिस्थिति में हों। माँ की कृपा से जीवन में कठिनाइयाँ भी मार्गदर्शन का साधन बन जाती हैं। सच्चा भक्त वही है जो हर हृदय में माँ का स्वरूप देखता है। जब यह भाव हमारे जीवन का हिस्सा बन जाता है, तो सारा संसार हमें एक परिवार जैसा प्रतीत होता है — माँ की ममता से भरा हुआ।

Shiv murti

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