बालाजी का सुमिरन कर ले | हर सांस में भक्ति और विश्वास का संचार

बालाजी का सुमिरन कर ले | हर सांस में भक्ति और विश्वास का संचार

“बालाजी का सुमिरन कर ले” — यह वाक्य हमें याद दिलाता है कि जीवन की हर कठिनाई का समाधान ईश्वर के नाम में छिपा है। जब हम बालाजी का सुमिरन करते हैं, तो हमारी आत्मा को स्थिरता और मन को शांति मिलती है। बालाजी (हनुमान जी) केवल शक्ति के देव नहीं, बल्कि भक्ति, सेवा और निष्ठा के प्रतीक हैं। उनका नाम स्मरण करने से भय मिट जाता है, आत्मविश्वास बढ़ता है और जीवन में सकारात्मकता का प्रकाश फैलता है। जो भी श्रद्धा से बालाजी का नाम जपता है, उसके जीवन में शक्ति और सुख का प्रवाह स्वतः ही शुरू हो जाता है।

rajeshswari

बालाजी को सुमिरन कर ले,
तो काम थारो हो जासी,
भक्ति को जोर लगा ले रे,
वरना पाछे पछतासी,
बालाजी को सुमिरण कर ले,
तो काम थारो हो जासी…..

तू तो मस्ती में खोयो रे,
तू तो जी भर के सोयो रे,
थारो काम नहीं होयो रे,
पक्को जोर तू नाही लगायो,
भक्ति को तू जोर लगा ले,
थोड़ी मजबूती तो ल्या रे,
नहीं तो यमड़ो जूता मारे,
वो तो पुछेलो के ल्यायो,
कर ले तू बाला से यारी,
थारी टल जासी रे फांसी,
थारी टल जासी रे फांसी,
बालाजी को सुमिरण कर ले,
तो काम थारो हो जासी…..

के है बेटो के है नारी,
के कर लेसी रिश्तेदारी,
झूठी दुनियादारी सारी,
भाया कोई नहीं है थारो,
थारी कोठ्या महल अटारी,
रह जासी रे अठै ही सारी,
कर ले आगे की तैयारी,
तेने ले जासी बिणजारो,
बस नाम सहारो ही सांचो,
परलोक में काम वो आसी,
परलोक में काम वो आसी,
बालाजी को सुमिरण कर ले,
तो काम थारो हो जासी…….

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बालाजी को सुमिरन कर ले,
तो काम थारो हो जासी,
भक्ति को जोर लगा ले रे,
वरना पाछे पछतासी,
बालाजी को सुमिरण कर ले,
तो काम थारो हो जासी……

भाव से भक्ति करने की विधि

  1. दिन और समय: मंगलवार या शनिवार प्रातःकाल या संध्या समय सर्वोत्तम है।
  2. स्थान और तैयारी: एक स्वच्छ स्थान पर दीपक जलाएँ और बालाजी का चित्र या मूर्ति रखें।
  3. पूजन सामग्री: लाल फूल, गुड़-चना, सिंदूर और चोला अर्पित करें।
  4. प्रारंभ: तीन बार “जय बालाजी महाराज की” कहकर ध्यान लगाएँ।
  5. जप या भजन: श्रद्धा और भक्ति से “बालाजी का सुमिरन कर ले” पंक्ति का जप करें या भजन गाएँ।
  6. भावना रखें: मन में यह अनुभव करें कि बालाजी आपकी हर चिंता को दूर कर रहे हैं और आपको बल एवं संतोष दे रहे हैं।
  7. समापन: अंत में हाथ जोड़कर कहें — “हे बालाजी, मेरा मन सदा आपके सुमिरन में लीन रहे।”

बालाजी के सुमिरन से मिलने वाले लाभ

  • मन की शांति: सुमिरन से मानसिक तनाव और चिंता मिटती है।
  • भय से मुक्ति: हर प्रकार का भय, शंका और भ्रम समाप्त होता है।
  • साहस की प्राप्ति: बालाजी की कृपा से आत्मविश्वास और शक्ति बढ़ती है।
  • सफलता का मार्ग: कठिन कार्य भी सहजता से पूर्ण होते हैं।
  • भक्ति की वृद्धि: मन में सदैव ईश्वर स्मरण और प्रेम बना रहता है।

निष्कर्ष

“बालाजी का सुमिरन कर ले” — यह केवल एक भजन की पंक्ति नहीं, बल्कि जीवन जीने का सुंदर संदेश है। जब मनुष्य हर स्थिति में बालाजी का नाम लेता है, तो उसके भीतर की नकारात्मकता दूर होकर भक्ति और बल का संचार होता है। जीवन की उलझनों में भी यदि सुमिरन बना रहे, तो हर राह सरल हो जाती है। इस भाव से जिया गया जीवन न केवल सुखद बल्कि प्रभु की कृपा से पूर्ण बन जाता है।

Shiv murti

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