रूप धरे विकराल मैया | माँ दुर्गा के रौद्र रूप की शक्ति और कृपा

रूप धरे विकराल मैया | माँ दुर्गा के रौद्र रूप की शक्ति और कृपा

“रूप धरे विकराल मैया” यह वाक्य माँ दुर्गा के उस दिव्य रूप की स्मृति दिलाता है, जब वे अपने भक्तों की रक्षा और अधर्म के विनाश के लिए विकराल रूप धारण करती हैं। यह रूप केवल विनाश का नहीं, बल्कि न्याय और संतुलन का प्रतीक है। माँ शक्ति का यह स्वरूप हमें सिखाता है कि जब संसार में अन्याय बढ़ता है, तब मातृशक्ति स्वयं आगे बढ़कर धर्म की रक्षा करती है। उनके इस रूप से भय नहीं, बल्कि साहस और आत्मबल का संचार होता है।

rajeshswari

स्थाई
रूप धरे विकराल मैया रूप धरे विकराल
जिनके आगे दानव भागे आ जाए भूचाल
रूप धरे विकराल ओ मैया रूप बड़ा विकराल

अंतरा पहला
खड़ग त्रिशूल को लेकर , मन में क्रोध भयंकर
समर मे ऐसी गरजे , दानव कापे थर थर -2
पाप मिटाए जगत बचाए, दुनिया हुई खुशहाल
रूप धरे विकराल ओ मैया रूप बड़ा विकराल

अंतरा दूसरा
रूप भयानक काला , पहने मुंड की माला
छोड़े मैया ज्वाला , पिये लहू का प्याला -2
शक्तिशाली ममता वाली , संकट देती टाल
रूप धरे विकराल ओ मैया रूप बड़ा विकराल

अंतरा तीसरा
दानव दल को मिटाने , चली है मैया ठाने
लगी कटार चलाने , दुष्ट लगे घबराने -2
करो निरंजन माँ का वंदन , मैया बड़ी दयाल
रूप धरे विकराल ओ मैया रूप बड़ा विकराल

रूप की आराधना विधि

  1. दिन: मंगलवार, शुक्रवार या नवरात्रि के अष्टमी-नवमी दिन।
  2. स्थान: घर के पूजास्थल या माँ काली/दुर्गा के मंदिर में।
  3. सामग्री: लाल फूल, सिंदूर, चंदन, धूप, दीपक, कपूर, नारियल और लाल वस्त्र।
  4. पूजन क्रम:
    • माँ दुर्गा के चित्र या मूर्ति के सामने दीपक जलाएँ।
    • माँ से प्रार्थना करें — “हे विकराल रूप धारण करने वाली माँ, हमारे भय और दुःख का नाश करें।”
    • “जय माँ दुर्गा” या “या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता” मंत्र का 11 बार जप करें।
    • अंत में आरती करें और प्रसाद बाँटें।
  5. भाव: पूजा करते समय साहस और श्रद्धा का भाव रखें — माँ के इस रूप से भय नहीं, बल्कि शक्ति और विश्वास मिलता है।
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माँ के विकराल रूप की उपासना के फल

  • भय, शत्रु और नकारात्मक शक्तियाँ समाप्त होती हैं।
  • साहस, आत्मबल और निर्णय शक्ति में वृद्धि होती है।
  • जीवन के संकटों से रक्षा होती है।
  • रोग, दुःख और मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है।
  • माँ की कृपा से सफलता, स्थिरता और आत्मविश्वास प्राप्त होता है।

निष्कर्ष

“रूप धरे विकराल मैया” हमें यह सिखाता है कि माँ की शक्ति केवल कोमलता नहीं, बल्कि दृढ़ता और साहस का भी प्रतीक है। जब हम जीवन में कठिनाइयों से घिर जाते हैं, तब माँ का यही रूप हमें निर्भीक और अडिग बनाता है। उनका विकराल रूप बुराई का अंत और सच्चाई की विजय का प्रतीक है। माँ की आराधना से हमें यह विश्वास मिलता है कि चाहे परिस्थिति कितनी भी विकट हो, माँ की कृपा और शक्ति के सहारे हम हर अंधकार को मिटा सकते हैं।

Shiv murti

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