मंदिर सूना बिन ज्योति | भक्ति का प्रकाश ही है जीवन की सच्ची रोशनी

“मंदिर सूना बिन ज्योति” — यह पंक्ति केवल एक वाक्य नहीं, बल्कि जीवन का गहरा संदेश है। मंदिर की शोभा दीपक की लौ से होती है, उसी तरह जीवन का सौंदर्य भक्ति की ज्योति से। जब मन में आस्था का दीप जलता है, तो अंधकार मिट जाता है — चाहे वह दुःख का हो, भय का या मोह का। यह भाव हमें सिखाता है कि बाहरी दीपक जलाने के साथ-साथ हमें अपने हृदय की लौ भी जलाए रखनी चाहिए, जो सदैव ईश्वर के प्रेम से प्रज्वलित रहती है।

rajeshswari

बालाजी के प्यार बिना राम के दीदार बिना,
किस्मत जागे ना सोती माला सुनी बिन मोती,
मंदिर सूना बिन ज्योति माला सूनी बिन मोती……

राम मेरे हनुमान बिना सेवा श्रध्दा ज्ञान बिना,
पुरी इच्छा ना होती माला सुनी बिन मोती,
मंदिर सूना बिन ज्योति माला सूनी बिन मोती……

मेंहदीपुर के धाम बिना बालाजी के नाम बिना,
भक्ति चित ने ना मोहती माला सुनी बिन मोती,
मंदिर सूना बिन ज्योति माला सूनी बिन मोती……

सुना कमल जल खुशबु बिना दर्शन ना सही लो ए बिना,
जल बिन अंखियां ना रोती माला सुनी बिन मोती,
मंदिर सूना बिन ज्योति माला सूनी बिन मोती……

विधि

  1. स्थान की तैयारी: पूजा स्थल को स्वच्छ करें और किसी शांत स्थान पर दीपक रखें।
  2. दीपक प्रज्वलन: तिल या घी का दीपक जलाएँ — यह भक्ति और प्रकाश का प्रतीक है।
  3. स्मरण: दीपक जलाते समय कहें — “हे प्रभु, जैसे यह लौ अंधकार मिटाती है, वैसे ही मेरे जीवन से अज्ञान दूर करें।”
  4. नाम जप: दीपक के सामने अपने आराध्य देव का नाम या मंत्र जपें।
  5. भक्ति का भाव: दीपक की लौ को देखते हुए ध्यान करें कि ईश्वर का प्रकाश आपके हृदय में भी फैल रहा है।
  6. समापन: अंत में प्रणाम करें और भगवान का धन्यवाद करें।
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लाभ

  • मन की शुद्धि: दीपक का प्रकाश नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है।
  • आध्यात्मिक शांति: ज्योति के दर्शन से मन को स्थिरता और संतोष मिलता है।
  • सकारात्मक वातावरण: घर या मंदिर का माहौल पवित्र और शांत हो जाता है।
  • भक्ति की वृद्धि: मन ईश्वर से जुड़कर आनंद का अनुभव करता है।
  • आत्मविश्वास और आशा: प्रकाश का प्रतीक दीपक जीवन में नई ऊर्जा भरता है।

निष्कर्ष

“मंदिर सूना बिन ज्योति” — यह पंक्ति हमें यह सिखाती है कि बाहरी दीपक की तरह हमें अपने मन में भी विश्वास, प्रेम और भक्ति की ज्योति जलानी चाहिए। जब हृदय में श्रद्धा का प्रकाश जलता है, तब हमारा जीवन मंदिर बन जाता है, और उस मंदिर में सदा ईश्वर का वास होता है।

Shiv murti

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