अज पागा वाला खुशियां दा दिन चढ़या

“अज पागा वाला खुशियां दा दिन चढ़या” यह वाक्य उस हर्ष और कृतज्ञता का प्रतीक है जो मनुष्य को ईश्वर की कृपा से प्राप्त होता है। जब जीवन में शुभ अवसर, सफलता या आनंद का क्षण आता है, तो भक्त जान लेता है कि यह सब प्रभु की मेहर का परिणाम है। यह भाव सिखाता है कि हर खुशियों भरा दिन, प्रभु द्वारा दिया गया एक वरदान है। जब हम इस दिन को आभार, भक्ति और प्रेम से जीते हैं, तब हमारा हर कार्य मंगलमय हो जाता है।

rajeshswari

दिन चढ़या दिन चढ़या ,अज पागा वाला खुशिया दा दिन चढ़या
अज पागा वाला खुशिया दा दिन चढ़या
असी हो गए निहाल असी हो गए माला माल-2

असी सतगुरु प्यारेदा लड़ फडेया
दिन चढ़या दिन चढ़या अज पागा वाला खुशिया दा दिन चढ़या
अज पागा वाला खुशिया दा दिन चढ़या

मेरे सतगुरां ने कृपा कर दीति ऐ-2
सबदे दिला दी मुराद पूरी कीती ऐ-2
कृपा कर दिति ऐ, मुराद पूरी कीति ए-2
असी हो गए निहाल, असी हों गए मालामाल-2
असी सतगुरू प्यारे दा लड़ फड़ेया
दिन चढ़या….

अज मस्ती सबते छाई होई ऐ-2
अज तेरी वी बारी आई होई ऐ-2
असी हो गए निहाल असी हो गए मालोमाल-2
असी सतगुरु प्यारे दा लड़ फडेया
दिन चढ़या……

मेरे सतगुरां ने दर्श दिखाए ने-2
सानुमिठे मिठे बचन सुनाए ने-2
दर्श दिखाए ने, बचन सुनाए ने-2
असी है गए निहाल, असी हो गए मालोमाल-2
असी सतगुरु प्यारे दा लड़ फडेया
दिन चढ़या……

अज पागा बाला…..

विधि

  1. समय: सुबह सूर्योदय के बाद स्नान कर साफ वस्त्र धारण करें।
  2. स्थान: अपने घर के पूजा स्थल में दीपक जलाएँ और ईश्वर को ताजे फूल अर्पित करें।
  3. भाव: मन में कहें — “हे प्रभु, आज का दिन आपकी कृपा का प्रतीक है, इसे शुभता से बिताने की शक्ति दें।”
  4. मंत्र जाप: “ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं नमः” या अपने आराध्य का नाम 11 बार लें।
  5. आभार व्यक्त करें: अपने जीवन की हर उपलब्धि और सुख के लिए ईश्वर को धन्यवाद दें।
  6. सेवा भाव: दिनभर किसी जरूरतमंद की सहायता करने का संकल्प लें।
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इस भाव से मिलने वाले लाभ

  • मन में सकारात्मकता और आनंद की भावना उत्पन्न होती है।
  • आभार और संतोष का भाव जीवन में गहराई लाता है।
  • प्रभु की कृपा और आत्मविश्वास दोनों बढ़ते हैं।
  • परिवार में प्रेम और समरसता बनी रहती है।
  • हर कार्य में सफलता और शुभ फल प्राप्त होते हैं।

निष्कर्ष

“अज पागा वाला खुशियां दा दिन चढ़या” केवल एक वाक्य नहीं, बल्कि एक जीवन दर्शन है — जो हमें हर नए दिन को एक उत्सव की तरह मनाने की प्रेरणा देता है। जब हम प्रभु का नाम लेकर दिन की शुरुआत करते हैं, तो सारा दिन प्रकाश और प्रसन्नता से भर जाता है। ईश्वर की कृपा से जब मन में आभार और प्रेम बस जाता है, तब हर क्षण एक नई शुरुआत बन जाता है। सच में, प्रभु की मेहर से ही हर दिन “खुशियां दा दिन” बन जाता है।

Shiv murti

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